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५-जून ( विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

५-जून ( विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में)

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पर्यावरणिक तंत्र है, सात सुरों का राग.
भू, अम्बर, जल तत्व सब, अन्तः गर्भित भाग.
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भूधर,जलधर, वायुधर,सब की बदली चाल.
जड़ चेतन सब कांपते, हो दूषित बदहाल.
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क्षत विक्षत जल 'औ' धरा , बदल रही जलवायु.
सुख संसाधन बड़ रहे,  घटी मनुज की आयु.
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प्रकृति करे अनुनय विनय,सुन लो करुण पुकार.
रक्षा की कर याचना, माँग रही है प्यार.
****************************************************
डॉ. प्राची

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 10:54pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी

प्रकृति की अनुनय विनय.. इसका मात्रिक दोष तो मै जान गयी थी, पर रक्षा में आधे क का मात्रिक भार र पर पढ़ रहा है, ये तो मैंने नहीं सोचा था...
क्या यही नियम "त्र" व "ज्ञ" के लिए भी लागू होते हैं...?

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 6, 2012 at 10:27pm

डा प्राची, आपकी जिज्ञासा और भाई आशीष के सुझाव पर हार्दिक प्रसन्नता हुई. वस्तुतः इंगित छंदों में मात्रिक दोष ही है.

क्षत विक्षत जल और धरा = ११२११११२११२ = १४

प्रकृति की अनुनय विनय= १११ २ ११११ १११ = १२

रक्षा की करे याचना = २२ २१२२१२ = १४

देखिये, यदि मैं यथोचित कह पाया.  सधन्यवाद.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 8:18pm
हार्दिक आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी  

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 6, 2012 at 4:41pm

बहुत सुन्दर सार्थक दोहे रचे हैं प्राची जी हार्दिक बधाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 12:50pm

हार्दिक आभार आशीष यादव जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 12:50pm

हार्दिक आभार आदरणीय सूर्या बाली जी

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on June 6, 2012 at 12:47pm

प्राची जी सादर अभिवादन ! आपने प्रकृति की पीड़ा को इन चार दोहों के माध्यम से व्यक्त कर दिया। ये अद्भुत है। बहुत सुंदर दोहे रचे हैं आपने। प्रकृति सरक्षण में इनका विशेष योगदान रहेगा। पर्यावरण  दिवस सभी को मुबारक हो !! बहुत बहुत बधाई !!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 9:39am
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी,
इस प्रयास को सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार.
आग्रह है,  आप रेफ व पदेन की मात्रा तथा अर्धवर्णाक्षरों  की मात्रा गणना को कृपया स्पष्ट करने का कष्ट करें, ताकि नव रचनाकार इस आवश्यक बिंदु को स्पष्टता से ग्रहण कर सकें, व भविष्य में इस कारण होने वाली त्रुटियों को दूर किया जा सके.
आपका पुनः हार्दिक आभार.
सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 6, 2012 at 9:22am
बहुत बहुत आभार आदरणीय अलबेला खत्री जी 
आपने इन दोहों को सराह कर मेरा उत्साह बढाया है. पुनः आभार. 
Comment by आशीष यादव on June 6, 2012 at 7:57am
सारे दोहे बहुत अच्छे लगे। काफी खूबसूरती से लिखा है आपने। बधाई स्वीकारिये।
आदरणीय सौरभ सर, कृपया दोषयुक्त चरणोँ को चिन्हित कर दीजिए जिससे हम लोग भी समझ सकेँ।
सादर

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