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इण्डिया टी० वी० की ताज़ा  खबर:निर्मल बाबा के जून में दिल्ली श्रीफोर्ट में होने वाले चारों समागम स्थगित हो गए हैं बेचारे बाबा भक्तों के पैसे लौटाएंगे श्रीफोर्ट बुकिंग  के नौ लाख रुपये लौटा दिए I
कठोर बाबा
प्यारे निर्मल भक्तो 
न घबराएँ न शरमाएँ 
यह पैसे लेकर सीघे हमारी शरण में आएँ
और आधे पैसों में दुगुना मज़ा पाएँ 
हम निर्मल नहीं बाबा कठोर हूँ
अब आपकी समस्याओं का इकलौता तोड़ हूँ 
आप पर कृपा बरसेगी जरूर
एक बार हमें भी आजमायें ज़रूर
खीर,पराँठे,गोलगप्पे,रसगुल्ले की रेहढ़ियाँ 
आश्रम के बाहर ही लगाव रखी हैं
पर्स,गहने,चूड़ियों की दुकानें 
आपके लिए सजा रखी हैं
आते जाएँ कृपा पाते जाएँ
हम जो बतलाएँ वो खाते जाएँ 
उनको बना दिया करोड़पति
हमको भी तो लखपति तो बनाते जाएँ
मांसाहारियों के लिए अलग व्यवस्था है
चिंता न करें हमारे फाईवस्टार से सस्ता है 
फोटो हमारी प्यारे भक्तो मिलेगी ऑन डिमांड
स्टूडियो हमारा अपना है कोई कर नहीं सकता कांड 
-----------
आशीर्वाद सहित
 
आपका अपना प्यारा कठोर बाबा 
 
दीपक 'कुल्लुवी'
08 /06 /12 . 

Views: 582

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Comment by MAHIMA SHREE on June 8, 2012 at 10:49pm
आदरणीय कुलुवी जी .. बेजोड़ ... बहुत बढ़िया व्यंग .. बधाई आपको  
Comment by Albela Khatri on June 8, 2012 at 6:04pm

ha ha ha ha ha ha

Deepak Kuluvi ji kamaal kar diya ........dhmal kar diya ...ha ha ha

badhaai is sundar lekhan ke liye

Comment by SUMIT PRATAP SINGH on June 8, 2012 at 2:26pm

:) :) :)

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on June 8, 2012 at 2:21pm

NEERAJ,MANU,SHUKLA JI AAP SABKA DHANYABAD

Comment by जगदानन्द झा 'मनु' on June 8, 2012 at 2:04pm

आधुनिक बाबाओ   पर सटीक प्रहार , बढ़िया रचना के लिए आपको बधाई 

 

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 8, 2012 at 1:56pm

क्या बात है कुल्लवी जी , निर्मल के अपोजिट कठोर , पर कुश्वाहाजी की चौथी पंक्ति पर ध्यान दीजियेगा | बधाई |

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on June 8, 2012 at 12:54pm
मेरे सर्वप्रथम भक्त प्रदीप कुशवाहा जी का कठोर बाबा की तरफ से स्वागत है मेरा कंगाल बैंक का अकाउंट न है 420 कुछ न कुछ  डालते  रहें  तभी  कृपा बरसेगी.........
 
सुन्दर लिखा है आपनें ........
DHANYABAAD.....
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 8, 2012 at 12:47pm

आदरणीय कठोर बाबा मेरा शत शत प्रणाम

निर्मल से कठोर बने मुफ्त हुए बदनाम

मुफ्त हुए बदनाम हो गयी ऐसी की तैसी

खूब जमी थी दुकान आपकी बन न सकेगी वैसी

मै तो हूँ पुराना चेला साथ गिल्ली डंडा खेला

छुप छुप के गलियों में चुराया था तबेला 

भूल न जाना याद रखना वो पुराना व्यवहार

अपने साथ साथ करवाना मेरा भी उद्धार 

आपका पुराना चेला.. वसत बहार

कृपया ध्यान दे...

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