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फूल ताउम्र तो बहारों में नहीं रहते


फूल ताउम्र तो बहारों में नहीं रहते
हम भी अब अपने यारों में नहीं रहते

मुहब्बत है गर तो आज ही कह दो मुझसे
ये फैसले यूं उधारों में नहीं रहते

अब जानी है हमने दुनिया की हकीकत
अब हम आपके खुमारों में नहीं रहते

दिल तोड़ दो बेफिक्र कोई कुछ न कहेगा
ये छोटे से किस्से अखबारों में नहीं रहते

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते

बस वजूद की ही जंग है महफिलों में बाकी
वो तूफ़ान भी अब आशारों में नही रहते


-पुष्यमित्र उपाध्याय

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Comment

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 12, 2012 at 4:27am

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है 
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते..........

पुष्यमित्र साहेब ,  ..... बहुत खूबसूरत पेशकश . दाद कुबूल फरमाएं!

Comment by वीनस केसरी on December 12, 2012 at 2:12am

भाई जी सुन्दर अभिव्यक्ति है
हार्दिक बधाई स्वीकारें
 
निवेदन है कि मुझे इस ग़ज़ल का अर्कान बता दें तो लयात्मक रूप से पढ़ कर और आनंद उठा सकूं ....

Comment by satish mapatpuri on December 12, 2012 at 1:27am

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते..........

पुष्यमित्र साहेब , रकीब तो खिलाफत में रहेगा ही ..... बहुत खूबसूरत पेशकश . दाद कुबूल फरमाएं

Comment by MAHIMA SHREE on December 11, 2012 at 10:49pm

दिल तोड़ दो बेफिक्र कोई कुछ न कहेगा
ये छोटे से किस्से अखबारों में नहीं रहते

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते......

नमस्कार पुष्यमित्र जी ..

बहुत ही खुबसूरत गजल .. बधाई आपको



Comment by नादिर ख़ान on December 11, 2012 at 10:39pm

वाह बहुत उम्दा गज़ल क्या कहने पुष्यमित्र जी 

लाजवाब रचना ...

Comment by ajay sharma on December 11, 2012 at 10:01pm

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है 
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते..........wah wah wah wah no more words 

Comment by Pushyamitra Upadhyay on December 11, 2012 at 9:51pm

सादर आभार व्यक्त करता हूँ आदरणीय श्री गणेश सर....आशीष बनाए रखिये
-आपका अनुज पुष्यमित्र


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 11, 2012 at 9:17pm

फूल ताउम्र तो बहारों में नहीं रहते
हम भी अब अपने यारों में नहीं रहते................शानदार मतला,

मुहब्बत है गर तो आज ही कह दो मुझसे
ये फैसले यूं उधारों में नहीं रहते......................वाह वाह, बहुत खूब , सुन्दर कहन, साफ़ साफ़ बोल दो, नहीं तो बेकार समय बर्बाद करने से क्या फायदा, कही और ट्राई किया जाय ...हा हा हा हा |

अब जानी है हमने दुनिया की हकीकत
अब हम आपके खुमारों में नहीं रहते.............बहुत खूब जनाब , यह शेर भी बढ़िया निकाला है |

दिल तोड़ दो बेफिक्र कोई कुछ न कहेगा
ये छोटे से किस्से अखबारों में नहीं रहते........दिल के अखबार में कई किस्से छपे होते है भाई , बढ़िया शेर |

मेरा रकीब भी आज मेरी खिलाफत में है
लोग हमेशा तो किरदारों में नहीं रहते..........आय हाय हाय , क्या बात है, बहुत खूब |

बस वजूद की ही जंग है महफिलों में बाकी
वो तूफ़ान भी अब आशारों में नही रहते.......अच्छा है |

दाद कुबूल करें पुष्यमित्र जी |

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