For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलिया एक प्रयास

आदरणीय श्री अरुण कुमार निगम सर के द्वारा संशोधित की गई कुण्डलिया आप सभी के समक्ष सादर पेश कर रहा हूँ कृपया स्वीकारें .

सोवत जागत हर पिता, करता रहता जाप,
रखना बिटिया को सुखी, हे नारायण आप

हे नारायण आप , कृपा अपनी बरसाना
मिले मान सम्मान,मिले ससुराल सुहाना
बीते जीवन नित्य,प्रेम के पुष्प पिरोवत
अधरों पर मुस्कान,सदा हो जागत सोवत ||

सादर

Views: 425

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 10, 2013 at 4:58pm

अनेक-अनेक धन्यवाद आदरणीय कुशवाहा सर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 4:42pm

बहुत सुन्दर भाव 

बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 28, 2012 at 5:02pm

वाह गुरुदेव सत्य बतलाया आपने सुन्दरता और निखर गई है आभार..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 28, 2012 at 4:58pm

धन्यवाद, अरुन अनन्तजी..

अब सोवत जागत आदि शब्दों को सोता जगता आदि कर के अपने छंद को पुनः देखिये, आप अपने प्रयास पर स्वयं दंग हो जायेंगे.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 28, 2012 at 4:55pm

आदरणीय गुरुदेव आपकी वाह - वाही मिली मैं धन्य हुआ, गुरुदेव आपका कथन मेरे लिए सदैव प्रेरणादाई होता है, मुझे ज्ञात है की आप हम सबका भला चाहते हैं और भला सोंचते हैं ऐसे में आपकी प्रतिक्रिया को मैं अन्यथा कैसे ले सकता हूँ सर, सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 28, 2012 at 4:03pm

मिले मान सम्मान,मिले ससुराल सुहाना  ..  वाह-वाह !  बहुत ही सुन्दर !!

एक सधा हुआ प्रयास हुआ है, अरुण जी.  हृदय से बधाई कह रहा हूँ.

आपकी कलम योंही संयत और उर्वर रहे.

एक निवेदन : जागत, सोवत, पिरोवत जैसे शब्दों के प्रयोग के पीछे क्या आग्रह रहा होगा ?  ये आसानी से जगता, सोता, पिरोता किये जा सकते हैं और इन शब्दों का यह रूप प्रस्तुत छंद को खड़ी हिन्दी भाषा का सुन्दर उदाहरण बनाता.

भाई, यह अवश्य है कि आंचलिक शब्दों का यदा-कदा प्रयोग हिन्दी भाषा में पदों के लालित्य तथा उसकी संप्रेषणीयता को कई गुणा बढ़ा देता है. लेकिन ऐसा प्रयोग यदि संयत न हुआ तो यही अजीब सा लगता है.

विश्वास है, मेरे कहे को आलोचना की तरह न ले कर इसे मेरी समझ मान कर स्वीकारेंगे.

शुभेच्छाएँ.

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 28, 2012 at 12:25pm

आदरणीय प्राची दीदी आपकी सराहना, स्नेह और सहयोग मुझे सदैव प्रेरित करता है, आपसे बधाई पाके ह्रदय प्रसन्न हुआ अनेक-२ धन्यावाद दी. 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 28, 2012 at 12:24pm

आदरणीय अशोक सर कुण्डलिया आपको पसंद आई प्रयास सफल हुआ हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 28, 2012 at 10:38am

प्रिय अरुण जी,

अपनी पुत्री के प्रति एक पिता के स्वाभाविक मनोभावों को फ़िक्र को सुन्दर शब्द दिए हैं, हार्दिक बधाई.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 28, 2012 at 8:42am

अरुणजी भाई, बिटिया के लिए सुन्दर भाव पिरोती कुंडलिया के लिए बधाई स्वीकारें.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service