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सॉहब गान (जन हित मे जारी)

सर आप महान है

हम आपकी संतान है

आप हमारे राजा राम

हम आपके हनुमान है

सर आप महान है

आपके अधीनस्थ है यही अभिमान है

खुफिया है आपके, आपके ही कान है

आपकी खुराक का हमे पूरा घ्यान है

आप हमारे सेनापति हम आपके जवान है

सर आप महान है

आपके के कारण कार्यालय का नाम है

आपकी कार्यशैली का सब करते गुणगान है

बड़े बड़ों नेताओं से आपकी पहचान है

सबने माना लोहा आपका, आप विभाग की शान है

सर आप महान है

आप खाते है खिलाते है ऊपर पहुँचाते है

तभी तो ऊपर से आप पॉवर ले आते है

जिससे भय हो, उसे बना लेते अपना

राम नाम जपना पराया माल अपना

छवि आपकी उजली रहे,आप करते खूब दान है

सर आप महान है

नियम कायदों के आप है, पुजारी

लक्ष्मी के आदेश पर करते कारगुजारी

ऊँची पहुँच की रहती खुमारी

इसलिए चलती है आपकी रंगदारी

हम है राग बेसुरे आप सुरीली तान है

सर आप महान है

काजू के बिस्कुट, खाता रहे आपका टौमी

मार्बल ग्रेनाइट की बनायें आप बामी

भ्रष्ट्रचार की मशाल आपने थामी

अपने कारनामो से ले आयें सुनामी

अफसरी का आपको मिला बरदान है

सर आप महान है

मुझमें व् ,टौमी में नहीं करना भेद

आज काली करतूतें ही होती सफ़ेद

खुल जाये कलई तो जता दीजे खेद

लगे रहिये साहब क्योंकि तंत्र में है छेद

निर्भय बिंदास हो आप अपना कीजे उत्थान है

सर आप महान है

Dr.Ajay Khare Aahat

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Comment

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Comment by Dr.Ajay Khare on February 15, 2013 at 2:07pm

sadhubaad Dr Prachi


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 13, 2013 at 8:59pm

साहबगिरी पर बहुत सुन्दर रचना आ. डॉ. अजय जी , सादर.

Comment by Dr.Ajay Khare on February 13, 2013 at 4:09pm

sandeep ji mujhme aap jesi sahitya ki samajh to nahi jo dil ko chuta hai vhi sabdo mai piro deta hu aapko achha laga bas mere vhabo ko par lag gaye bahut bahut sadhubaad

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 13, 2013 at 12:11pm
वाह वाह सर जी ......................सच से सामना कराती हुई बेहतरीन रचना 
अंतर्मन को झकझोर के रख देती है ये अभिव्यक्ति 
बहुत बहुत बधाई आपको 

 

Comment by Dr.Ajay Khare on February 13, 2013 at 11:38am

sabhi adarniy ko sadhubaad 

Comment by vijay nikore on February 13, 2013 at 4:14am

आदरणीय अजय जी,

सुन्दर व्यंग्य के लिए बधाई।

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 12, 2013 at 11:18pm

डॉ. अजयजी, आपका तंज सीधे दिल में उतर रहा है. संभवतः आपकी कोई पहली कविता है जो मुझे एक पाठक के तौर पर देर तक झकझोरती रही.

जिस बेबाकी से आपने कथ्य साझा किये हैं वह आपके रचनाकार की तिलमिलहट को दर्शाता है.  इस व्यंग्य रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ.

Comment by ram shiromani pathak on February 12, 2013 at 7:39pm

मुझमें व् ,टौमी में नहीं करना भेद

आज काली करतूतें ही होती सफ़ेद

खुल जाये कलई तो जता दीजे खेद

लगे रहिये साहब क्योंकि तंत्र में है छेद

निर्भय बिंदास हो आप अपना कीजे उत्थान है

सर आप महान है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

आप भी कुछ कम नहीं सर जी ....उत्तम अति उत्तम रचना  ...........

Comment by Abhinav Arun on February 12, 2013 at 1:36pm

क्या कहूं डॉ अजय जी वाह वाह शानदार व्यंग्य कविता . आनंद आ गया आपकी बेबाक बयानी और साधा अंदाज़ बधाई बहुत अभूत इस अदभुत  रचना के लिए !!

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