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ग़ज़ल : सन्नाटे के भूत मेरे घर आने लगते हैं

सन्नाटे के भूत मेरे घर आने लगते हैं

छोड़ मुझे वो जब जब मैके जाने लगते हैं

 

उनके गुस्सा होते ही घर के सारे बर्तन

मुझको ही दोषी कहकर चिल्लाने लगते हैं

 

उनको देख रसोई के सब डिब्बे जादू से

अंदर की सारी बातें बतलाने लगते हैं

 

ये किस भाषा में चौका, बेलन, चूल्हा, कूकर

उनको छूते ही उनसे बतियाने लगते हैं

 

जिसकी खातिर खुद को मिटा चुकीं हैं, वो ‘सज्जन’

प्रेम रहित जीवन कहकर पछताने लगते हैं

-----------------------------------------------

(यह ग़ज़ल स्वरचित एवं अप्रकाशित है)

Views: 851

Comment

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Comment by वीनस केसरी on February 14, 2013 at 12:26am

वाह भई वाह वाह
क्या कमाल की ग़ज़लगोई है आहंग और अरूज का क्या खूबसूरत मंज़र पेश किया है
हर एक शेअर शानदार है

उनके गुस्सा होते ही घर के सारे बर्तन

मुझको ही दोषी कहकर चिल्लाने लगते हैं

इस शेअर के लिए अलग से बधाई स्वीकारें
जिंदाबाद भाई जिंदाबाद

Comment by नादिर ख़ान on February 13, 2013 at 11:25pm

जिसकी खातिर खुद को मिटा चुकीं हैं, वो ‘सज्जन’

प्रेम रहित जीवन कहकर पछताने लगते हैं

बहुत खूब कहा आदरणीय धर्मेंद्र जी...

जहाँ प्रेम है, वहीं शिकवा शिकायतें भी हैं ....

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 13, 2013 at 11:21pm

अद्भुत प्रेम का बखान किया आपने....वाह.. सुन्दर....


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 13, 2013 at 9:07pm

आदरणीय धर्मेन्द्र सिंह जी, आपकी यह मुसल्ल्सल ग़ज़ल अच्छी लगी ।

//उनके गुस्सा होते ही घर के सारे बर्तन

मुझको ही दोषी कहकर चिल्लाने लगते हैं//

इस शे'र पर विशेष दाद प्रेषित करता हूँ , बहुत बहुत बधाई ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 13, 2013 at 7:57pm

सन्नाटे के भूत मेरे घर आने लगते हैं

छोड़ मुझे वो जब जब मैके जाने लगते हैं...वाह क्या बात है!

बहुत सुन्दर ग़ज़ल, बहुत बहुत बधाई धर्मेन्द्र सिंह जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 13, 2013 at 7:02pm

उनको देख रसोई के सब डिब्बे जादू से

अंदर की सारी बातें बतलाने लगते हैं

 

ये किस भाषा में चौका, बेलन, चूल्हा, कूकर

उनको छूते ही उनसे बतियाने लगते हैं--------सब बर्तन आपकी शिकायत करने लगते होंगे हा हा हा  बहुत मजेदार ग़ज़ल अलग हटके दाद कबूल करें   आदरणीय धर्मेंद्र जी 

 

Comment by विजय मिश्र on February 13, 2013 at 6:14pm
क्या विषय छूआ है ! बिस्फारित करताहै . मजेदार है .
Comment by Dr.Ajay Khare on February 13, 2013 at 3:19pm

jab jab bhaye unko mayka aap bhi badliye apne dil ka jayka .ye baat aap kar dijiye aam bo bapis aa jayengi hote hi sham badhai sunder bedna

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