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प्रियतम मेरे 

फिर वही शाम वही तन्हाई 
दिल में मेरे वही दर्द ले कर आई 
....................................
प्रियतम मेरे 
ढूँढ़ रही है बेचैन निगाहें 
कहाँ खो गये दुनिया की भीड़ में
......................................
प्रियतम मेरे
मजनू बना प्यार में तेरे 
आईना भी नही पहचानता मुझे
.....................................
प्रियतम मेरे 
दर्देदिल ने कुछ ऐसा किया 
हो गया मै तुम्हारा उम्र भर के लिए
........................................
प्रियतम मेरे
हो न जाऊं कहीं पागल मै 
स्वाती अमृत की बूंद मुझे दे 
......................................
मौलिक और अप्रकाशित रचना 

Views: 765

Comment

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Comment by Rekha Joshi on February 20, 2013 at 1:08pm

अजय जी ,उत्साह वर्धन हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद 

Comment by ajay yadav on February 20, 2013 at 1:05pm

आईना भी नही पहचानता मुझे

बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति जी |

बधाई हों |

Comment by Rekha Joshi on February 20, 2013 at 12:55pm

विनीता जी आपका हार्दिक धन्यवाद 

Comment by Vinita Shukla on February 19, 2013 at 10:41pm

कोमल भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति. बधाई रेखा जी.

Comment by mrs manjari pandey on February 19, 2013 at 8:51pm

आदरणीय डॉक्टर अजय खरे जी धन्यवाद मेरा उत्साह बढाने के लिए।

Comment by mrs manjari pandey on February 19, 2013 at 8:48pm

आदरणीय सौरभ जी बहुत बहुत धन्यवाद . आपकी टिप्पड़ियां  हमारा मार्ग प्रशस्त करती हैं।

Comment by mrs manjari pandey on February 19, 2013 at 8:46pm

आदरणीया  रेखा  जी मधुरी  ग़ज़ल। हार्दिक शुभकामनायें।

Comment by Dr.Ajay Khare on February 19, 2013 at 12:11pm

rachna bahut bedna se bhari thi badhai

Comment by Rekha Joshi on February 19, 2013 at 11:55am

आ सौरभ जी ,आ राजेश जी आपके कमेंट्स मेरे लिए बहुत महत्व रखते है ,आपका हार्दिक आभार ,धन्यवाद 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 11:02am

मन के भावों को उभारती रचना बहुत बहुत बधाई रेखा जी| 

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