For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जाने क्यों आजकल

जब भी

देखता / सुनता हूँ ख़बरें

तो धड़कते दिल से

यही सुनना चाहता हूँ

न हो किसी आतंकी घटना में

किसी मुसलमान का हाथ...

 

अभी जांच कार्यवाही हो रही होती है

कि आनन्-फानन

टी वी करने लगता घोषणाएं

कि फलां ब्लास्ट के पीछे है

मुस्लिम आतंकवादी संगठन...

 

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

Views: 667

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2013 at 1:31pm

मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी..

वे मुसलमान नही आतंकवादी हैं

बस  

बधाई. सादर 

Comment by विजय मिश्र on March 18, 2013 at 1:08pm

अनवर भाई ! मन की अंतर्व्यथा को जिस सहजता से व्यक्त किया आपने , श्रद्धायोग्य है और सच तो ये है कि सारी इंसानियत ही सकते में है . जनाब ये दौर भी गुजर जायेगा और जुर्म की कोई पैदाइस जात नहीं होती . हाँ , इन आग से खेलने वालों को इसका पता नहीं  . साधुवाद 

Comment by Yogi Saraswat on March 11, 2013 at 11:30am

बड़ी शर्मिंदगी होती है

बड़ी तकलीफ होती है

कि मैं भी तो एक मुसलमान हूँ

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

मन की वेदना को बढ़िया  दिए हैं आपने !

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 11, 2013 at 10:59am

आपके भावो को सलाम श्री अनवर सोहेल भाई, विचारशील, संवेदनशील आप जैसे व्यक्तियों द्वारा ही यह 

जागरूकता लाइ जाकर किसी समाज पर मुट्ठी भर लोगो के कारण लगे धब्बे को धोया जा सकता है | 

आखिर शारीर में खून तो सबका ही लाल है | आवश्यकता है तो आप जैसे लोगो की जो समाज की 

सोच, दिशा और दशा बदल सकते है |

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 10, 2013 at 8:00pm

कि मेरे जैसे

अमन-पसंद मुसलमानों के बारे में

काहे नहीं सोचते आतंकवादी...

बहुत ही सुन्दर विचार! पर आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता वे सिर्फ आतंकवादी होते हैं!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 10, 2013 at 11:37am

उत्तम विचारों को समेटे सुन्दर कविता !!!
एक सच्चा दर्द जाहिर किया आपने इस कविता द्वारा |
हार्दिक शुभकामनायें आदरणीय अनवर जी |

Comment by asha pandey ojha on March 9, 2013 at 10:43pm

आदरणीय अनवर जीआपकी पीड़ा बहुत जायज है पूरी कौम को क्यों शर्मिंदगी ढोनी पड़े चंद सरफिरों के कारन ..अमन परस्त लोगों को बड़ी तकलीफ़ होती है ,आपके ज़ज्बातों को दिल से सलाम 

Comment by ram shiromani pathak on March 9, 2013 at 7:25pm

आदरणीय अनवर जी:

 इस सोच ने हमे सोचने पे मजबूर कर दिया है

बधाई ................

Comment by bhushan singh on March 9, 2013 at 6:52pm
आप के इस सोच ने हमे सोचने पे मजबूर कर दिया है कि हमारा भारत वाकाई महान है, जहां अाप जैसे लोग रहते है , बधाई

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 9, 2013 at 3:13am

जिस एकाकी पीड़ा को आप जैसे लोग जीने को अभिशप्त हैं, वही पीड़ा उन राक्षसों की विजयगाथा लिखती है. हृदय से निस्सृत भाव सटीक शब्द पा जायँ वही कविता है.

बधाई व शुभकामनाएँ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
24 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
26 minutes ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
1 hour ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted blog posts
2 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
3 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
12 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
18 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service