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पाधारो म्हारा देश

पाधारो म्हारा देश, पलक पावणा  बिछा देंगे
तुम जवानों के सिर काट लो, हम चुप नहीं बैठेंगे,कहकर सो जायेंगे

आतंक का नंगा नाच दिखाओ ,भेदिये  जुटा  देंगे  
कोई हमारे सब्र कि परीक्षा ना ले, और हम एक बार फिर फेल हो जायेंगे

खूब रेल जलाओ ,अपहरण करो ,आतंकी रिहा करा देंगे
शोर शराबा किया तो, सम्प्रदाइकता का  आरोप लगा ,ध्यान बटा देंगे

विदेशी व्यापारियों को बुलाओ ,बिचोलियों का बाजार लगा देंगे
अपने उद्योगों का गला घोंटकर ,प्रतिस्पर्धा के फायदे गिना देंगे

दहशतगर्दों को पनाह दो ,आँख पर पट्टी लगा लेंगे
कमीशन के हथियारों से सेना को सजा देंगे

पाधारो म्हारा देश, पलक पावणा  बिछा देंगे

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Comment

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 31, 2013 at 1:11pm

आदरणीय, दिलीप मित्तल जी, आपको सपरिवार प्रेम-सद्भावना के प्रतीक होली के पावन त्योहार पर बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं धन्यवाद।

Comment by Dr Dilip Mittal on March 30, 2013 at 9:03pm


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2013 at 8:01am

अपनी चुनी हुई सरकार की अटपटी नीतियों से बौखलाया जनमानस आपके कहे में स्वर पा रहा है, भाई दिलीप मित्तलजी.  यह कम बड़ी बात नहीं कि आपकी संवेदना वैयक्तिक न हो कर सामाजिक हुई है. 

लेकिन आप यह भी अवश्य अपने संज्ञान में रखें, भाईजी, कि यह एक साहित्य-मंच है. इस मंच पर परस्पर सीखना व सिखाना उद्येश्य है. अतः सुझावों को हृदयंगम करियेगा.       इसकी गरिमा बनाये रखियेगा.

शुभ-शुभ

Comment by Dr. Swaran J. Omcawr on March 15, 2013 at 1:13pm

बहुत बढ़िया व्यंग्पुरण आलेख 


sharing  के लिए आभार 
Comment by Yogi Saraswat on March 14, 2013 at 12:10pm

आतंक का नंगा नाच दिखाओ ,भेदिये  जुटा  देंगे  
कोई हमारे सब्र कि परीक्षा ना ले, और हम एक बार फिर फेल हो जायेंगे

खूब रेल जलाओ ,अपहरण करो ,आतंकी रिहा करा देंगे
शोर शराबा किया तो, सम्प्रदाइकता का  आरोप लगा ,ध्यान बटा देंगे

कुटिल और कुत्सित नीतियों पर बहुत सुन्दर और सार्थक व्यंग्य


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 14, 2013 at 10:40am

कुटिल नीतियों पर सार्थक व्यंग डॉ० दिलीप मित्तल जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 14, 2013 at 10:34am

अच्छा व्यंग है, सरकार की नाकामियों का,और भोली भाली जनता के लिए साम्प्रदायिकता जैसे शब्द जाल से 

ध्यान बटा अपनी रोटी सकते रहने के कारनामे पर, बधाई डॉ दिलीप मित्तल जी 

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 13, 2013 at 10:58pm
आ॰ डॉ॰ दलीप मित्तल जी, भारत की वर्तमान नाकारा सरकार की हकीकत खोलकर एक अच्छा व्यंग्य किया है आपने।
बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकारें।
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 13, 2013 at 9:47pm

आदरणीय श्री दिलीप मित्तल जी "शोर शराबा किया तो, सम्प्रदाइकता का आरोप लगा ,ध्यान बटा देंगे" सटीक व्यंग और यथार्थ, बहुत अच्छे--बधाई हो!

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