For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

‘‘मैं बाहर थी”

जब तुम बुझा रहे थे अपनी आग,

मै जल रही थी.

मैं जल रही थी  पेट की भूख से,

मैं जल रही थी माँ की बीमारी के भय से,

मैं जल रही थी बच्चों की स्कूल फीस की चिंता से .

जब तुम बुझा रहे थे अपनी आग,

मै जल रही थी.

*******

मैं बाहर  थी

जब तुम मेरे अंदर प्रवेश कर रहे थे

मैं बाहर  थी

हलवाई की दुकान पर.

पेट की जलन मिटाने के  लिए

रोटियां खरीदती हुई.

मैं बाहर  थी ,

दवा की दुकान पर

अपनी अम्मा के लिए

जिंदगी खरीदती हुई .

मैं बाहर थी

बच्चों के स्कूल में

फीस जमा करती हुई .

मैं बाहर थी

जब तुम मेरे अंदर प्रवेश कर रहे थे

अभिसार की उत्तेजना से मुक्त.

अपनी नग्नता से बेखबर

मैं बाहर थी !!!!

................. नीरज कुमार ‘नीर'

Views: 509

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 23, 2013 at 9:36am

नीरज कुमार जी, सुन्दर अभ्व्यक्ति है, थोडा सा परिवर्तन कर पेट की भूक मिटाने हलवाई की दूकान पर जाने की बात रचना के 

मध्य में लिखने के बजाय फीस जमा करा चुकने के बाद लिखी जाती तो उपयुक्त रहता ताकि सारी आवश्यक जिम्मेदारियों के 

बाद ही क्षुधा शांत करने की सोच हो | बहहाल एक अच्छी रचना के लिए बधाई |

Comment by coontee mukerji on March 23, 2013 at 12:58am

neeraj ji itni teekhee aur yatharth kavita..... samaj ke muha par kitna bharee thappar hai.araamdaayak jindagee ham jeete hai aur baree baree batein karte hai aur dusree taraf samaj ka dusra pahloo , bhookmaree aur bebasee.bahut theeka viang hai neeraj ji....aur kia kahoo........

Comment by vijay nikore on March 22, 2013 at 6:06pm

नीरज जी,

 

बहुत ही मार्मिक भाव हैं।

ऐसी अभिव्यक्ति आसान नहीं है।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by Pankaj Kumar Sah on March 22, 2013 at 5:04pm

सुंदर अभिव्यक्ति ....

Comment by Dr. Swaran J. Omcawr on March 22, 2013 at 2:30pm

बढ़िया , कभी कभार ऐसी रचना पढने को मिलती है 

बधाई सवीकार करें 
Comment by ram shiromani pathak on March 22, 2013 at 2:28pm

..आदरणीय नीरज कुमार नीर जी मर्मस्पर्शी रचना...

Comment by राजेश 'मृदु' on March 22, 2013 at 1:58pm

रचना का भाव पक्ष अच्‍छा लगा किंतु सारी चिंता एक पक्ष ही लेकर चला और दूसरा इससे बिल्‍कुल अलग-थलग रहा, इससे एकांगी भाव का आभास होता है । कई-कई विरोधाभास भी मेरे हिसाब से यहां हैं, यथा हलवाई की दुकान में रोटी खरीदना फिर वहीं पेट की भूख से जलना  फिर इन्‍हीं चिंताओं के समाधान हेतु दवा की दुकान, स्‍कूल की फीस भरना.....इत्‍यादि । एकबारगी ऐसा लगता है कि सताया गया पक्ष लाचार है फिर वही समाधान करता भी दिखता है जो लाचारी को खारिज करता है, सादर

Comment by Amod Kumar Srivastava on March 22, 2013 at 10:54am

मैं बाहर  थी , दवा की दुकान पर, अपनी अम्मा के लिए, जिंदगी खरीदती हुई ......आदरणीय नीरज कुमार नीर जी मर्मस्पर्शी रचना...

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 22, 2013 at 10:32am

आदरणीय नीरज कुमार नीर जी, आप की कविता "मैं बाहर थी" जिंदगी का सार ही है, नारी व्यथा!  जिसे आपने बखूबी प्रस्तुत किया।  आपको बहुज ढ़ेर सारी शुभ कामनाएं ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 22, 2013 at 9:39am

मर्मस्पर्शी रचना नीरज कुमार जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
12 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
13 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
15 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service