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मंच के सामने आठ दस लोग कुर्सियों पर बैठे थे। सफेद झक कुर्ता पायजामा पहने छरहरे बदन का एक युवक मंच पर खड़ा भाषण दे रहा था, ‘आज हमारे देश को भगत सिंह के आदर्शों की जरूरत है……..।‘ भाषण खत्म होने पर संचालक ने घोषणा की, ‘थोड़ी ही देर में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारम्भ होंगे।‘

कुछ देर बाद एक युवती रंग बिरंगी वेशभूषा में मंच पर आयी और उसने एक गीत पर नृत्य आरंभ कर दिया ‘……चिकनी चमेली……’

भीड़ धीरे धीरे बढ़ने लगी थी।

सीटियां बज रही थीं।

भगत सिंह शहीद हो चुके थे। चमेली महक रही थी।

.

                                - बृजेश नीरज

 

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Comment by vijay nikore on March 31, 2013 at 5:39pm

अभी कल की ही बात है ... शंकराचार्य जी की कृति Vivekachudamani के सतसंग में हम केवल ५ लोग थे,

उसी शाम को फ़िल्मी संगीत गोष्ठी में सुना है लगभग ५०० लोग गए।

 

जब तक हम श्रेय को छोड़ कर प्रेय को अंगिकार करते रहेंगे,

वही होगा जो आपने लघु-कथा में कहा है।

 

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 31, 2013 at 4:25pm

आदर्शों की शहादत और चमेली की महक के इंगितों से समाज में व्याप्त वर्तमान दिशाहीनता को बहुत खूबसूरती से लघुकथा में व्यक्त किया है आ० बृजेश जी, हार्दिक बधाई इस लघुकथा पर.

Comment by बृजेश नीरज on March 30, 2013 at 9:42pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी सत्य कहा आपने। आपका आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 30, 2013 at 9:33pm

ब्रजेश जी अफसोस होता है गुस्सा भी आता है आज हमारा देश बस नचनुओ का देश बनकर रह गया है बस भीड़ नाच पर ही जुड़ती है
इस लघु कथा पर बधाई आपको

Comment by बृजेश नीरज on March 29, 2013 at 9:23pm

आदरणीय सौरभ जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 29, 2013 at 1:42pm

भाई बृजेश जी, इस लघुकथा पर कहना कुछ नहीं, आजकी समझ और समझ की संवेदनहीनता पर मनन करने की आवश्यकता है.

इस प्रविष्टि हेतु बहुत-बहुत बधाई.

Comment by बृजेश नीरज on March 25, 2013 at 11:41pm

आदरणीय राज जी आपका आभार!

Comment by राज लाली बटाला on March 25, 2013 at 11:33pm

सत्य है !! बहुत अच्छे !! Neeraj ji 

Comment by बृजेश नीरज on March 25, 2013 at 11:23pm

आदरणीय शुभ्रांशु जी आपका आभार!

Comment by Shubhranshu Pandey on March 25, 2013 at 10:45pm

वाह क्या बात है...ये कल्चर अब तो आम हो चुका है....

कृपया ध्यान दे...

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