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होली आयी
खुशियां छायी
रंग बिखरे
संस्कृति के
स्नेह मिलन का
पर्व है होली
रंग-गुलाल देते सन्देश
प्रकृति के
विभिन्न रंगों का
कितनी भी जतन करो
रक्षा होती सदैव
सत्य की
असत्य सदैव
सत्य से हारा
रंग प्रतीक हैं
वसंतागमन का
जिस तरह
खिलते हैं
विभिन्न रंगों के फूल
वसन्त में
उसी तरह
बिखरते हैं रंग
होली पर्व में
खेलो होली मजे से
बुरी रीतियों से बचो
शराब पीना
होली के दिन
काला तेल डालना
रंग की जगह
कीचङ डालना
जुआ खेलना
बचना है
इन सब से
रंग लगाते समय
बचाव करो
आँखों का
क्योंकि
आँखेँ हैं अनमोल
होली पर्व है
खुशियों का
बिखेरो खुशियाँ
मत बिखेरो
कहीं पर ग़म
भुलाकर आपसी खटास
मन मिलाकर खेलो
परिवार संग होली
देता हूँ मैं भी
अपने सभी
आत्मीय जनों और
मित्रों को
शुभकामनाएँ
पावन पर्व
होली की।
- सतवीर वर्मा 'बिरकाळी'

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 28, 2013 at 5:53pm

सतवीर जी आपकी शुभकामनाये हम तक पहुँच गई हैं सुंदर प्रस्तुति व होली की हार्दिक बधाई|

Comment by Shanno Aggarwal on March 27, 2013 at 9:01pm

रचना पर बधाई व सभी को होली की ढेरों शुभकामनायें.  

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 26, 2013 at 12:01pm
आ॰ डॉ॰ प्राची सिंह जी, आपने इस तरफ अच्छा सचेत किया। आगे से इस बात का ध्यान रखुंगा कि ये कमी ना आने पाए। अभी अभी तो मैं नौसिखिया हूँ। आप साहित्यकारों के मार्गदर्शन में रहकर सब सीख लूँगा। आभार।
Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 26, 2013 at 11:58am
आ॰ केवल प्रसाद जी, कविता पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका आभार और आपको भी सपरिवार होली की शुभकामनाएँ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 26, 2013 at 11:25am

होली की शुभकामनाएं आo सतवीर वर्मा जी
अतुकांत कविताओं में भावसम्प्रेषण के समय सपाटबयानी से बचना चाहिए, अन्यथा सरसता नहीं रहती ।
शुभकामनाएं

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 26, 2013 at 6:52am

आदरणीय सतवीर वर्मा विरकाळी जी, सुप्रभात!  बहुत ही सुन्दर संदेश!! आपको भी होली के पावन अवसर पर इंद्रधनु सी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं!

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