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कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

इम्तिहान

एक दौर

चलता है जीवन भर !

सफलता

पाता है कोई

कभी थम जाये सफ़र !

कमजोर

का साथ

देना सीखा,

ज़रुरत

मदद की

उसे ही रहती .

सदा साथ

नर का

देती रही ,

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती ,

मगर नारी

चले मंजिल की ओर

पीछे उसके दूर दूर तक

वीराना रहे ,

और अकेली

वह इम्तिहान में

सफलता पाती !

फिर कौन मजबूत?

कौन कमजोर ?

दुनिया क्यों समझ न पाती ?

(मौलिक व् अप्रकाशित)

शालिनी कौशिक


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Comment

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Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 10:32pm
vandna ji aur yogi ji amulaya vicharon ke liye hardik dhanyawad.
Comment by Vindu Babu on April 16, 2013 at 4:01pm
आदरणीया शालिनी जी आपकी भावाभयक्ति का मैं आदर करती हूं। आज नारी सशक्तिकरण के दौर में भी नारी के सफलता मार्ग में पुरुषों की अपेक्षा अधिक वीराना होता है।दुसरी बात ज्यादा संघर्ष इसलिए भी होता है कि उसके साथ घर-बाहर दोनों के दायित्व जुड़े होतें हैं।
पर क्षमा करें आदरणीया क्योंकि यहां पर तुलना की बात बहुत ज्याद प्रासंगिक नहीं लगती,नार नारी दोनो ही एक दुसरे के पूरक हैं कहीं न कहीं एक नारी के जीवन मे पुरुष के रूप में पिता/भाई/शिक्षक/पति/आदि के रूप थोड़ा बहुत सहयोग तो रहता ही है। फिर महोदया नारी की शक्ति को आज तक कौन नकार पाया है,भले घर के अन्दर कोई नीचा दिखाने का दु:स्साहस कर ले।
सुन्दर भावपुर्ण रचना के लिए सादर बधाई स्वीकारें।
सादर
वन्दना
Comment by Yogi Saraswat on April 16, 2013 at 10:55am

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती ,

मगर नारी

चले मंजिल की ओर

पीछे उसके दूर दूर तक

वीराना रहे ,

और अकेली

सुन्दर शब्द शालिनी जी

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:24am

keval prasad ji hardik dhanyawad

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:22am

pradeep ji ,lakshman ji ,ram ji aap sabhi ka hardik dhanyawad

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:21am

@brijesh ji .abhi seekh rahi hoon aapke sujhav dhayan me rakhoongi .aabhar margdarshan ke liye .

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:19am
@prachi ji .sarahna hetu aabhar .
Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:17am
@ashok ji मगर नारी को ताकतवर दिखाने के चक्कर में नर से क्यों बैर ले बैठी हैं? भाई संदीप जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ और मुझे लगता है मिथ्या बातें रचना की अच्छी बातों का भी वजन कम कर देती हैं-aap swayam man rahe hain ki nari se nar kee chidh nari kee safalta ka sach kahne me nar se kahe ka vair aur fir aajkal to sach bolne se vair hota hai mithya se nahi isliye meri baten mithya hai ya satya swayam anuman laga lijiye .aapke vichar mere liye amulaya hai aage se dhyan me rakhoongi .aabhar
Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:11am
@sandeep ji हर समय उसके जीवन साथी ने उसका साथ निभाया होगा aap to swayam sanshay me hain aur sach kahoon ye satya hai .nar ne nari ka sath nari kee tarah nahi nibhya.aapke amulaya vicharon ke liye aabhar
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 15, 2013 at 10:38pm

आदरणीया शालिनी जी सादर, नारी को संबल देती रचना पर  बधाई. मगर नारी को ताकतवर दिखाने के चक्कर में नर से क्यों बैर ले बैठी हैं? भाई संदीप जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ और मुझे लगता है मिथ्या बातें रचना की अच्छी बातों का भी वजन कम कर देती हैं.मुझे लगता है इसपर ध्यान देने की आवश्यकता है.

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