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खुरदुरी हथेलियाँ 

कटी  फटी उंगलियाँ 
पच्चीस की उम्र में 
पचास के जैसी चेहरे पर
प्रौढ़ता की  लकीरें 
दस बीस इंटों से भरा तसला
सर पर ढोती 
बीच- बीच में दूर एक झाड़ी पर 
बंधे पुराने चिथड़ों से बने 
झूले पर नजर डालती ,
ना जाने उसका नन्हा 
कब भूख से बिलबिलाने लगे 
सोचकर अपने भीगे ब्लाउज को 
अपनी फटी धोती के पल्लू से छुपाती 
चढ़ी जा रही है  
हर सीढ़ी को  अपनी किस्मत 
की कहानियाँ सुनाती 
दूर कहीं से आवाज आ रही है 
मजदूर एकता जिंदाबाद 
मजदूर दिवस की बधाई हो !!!
******************************

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 3, 2013 at 11:43am

आदरणीय सौरभ जी  बहुत- बहुत हार्दिक आभार रचना के मर्म में अपने स्वर मिलाये।  आप सही कह रहे हैं अपने स्वार्थ में मजदूरों का प्रयोग करना उनसे नारे लगवाना सब इनके हथकंडे हैं उनकी स्थिति जाकर उनकी बस्ती उनके घरों या उनके परिवारों से जाकर पूछें मजदूर दिवस के नाम पर सिर्फ उनको ठगा जा रहा है। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 3, 2013 at 11:38am

आदरणीय अशोक रक्ताले जी बहुत- बहुत हार्दिक आभार रचना के मर्म में अपने स्वर मिलाये । 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 3, 2013 at 10:02am

आपकी संवेदनशीलता के प्रति हृदय से नमन करता हूँ.

मज़दूर के नाम पर संस्थाओं द्वारा किये जारहे घात-प्रतिघात कितनी असंवेदनशील हो चके हैं इसका आपने बखूबी वर्णन किया है. सुविधाभोगी ’मज़दूरों’ द्वारा ही नारे लगाये और लगवाये जाते हैं. वास्तविक मज़दूर तो सदा-सदा से हाशिये पर अपनी ज़िन्दग़ी को समेटता-फैलाता रहता है.

इस रचना पर बार-बार बधाई, आदरणीया राजेशकुमारीजी.

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 3, 2013 at 8:36am

आदरेया राजेश कुमारी जी सादर, बहुत ही मर्म स्पर्शी रचना, मगर दृश्य रोजमर्रा का यथार्थ को पुष्ट कर रहा है. और ये नारे मजदुर एकता जिंदाबाद!?शायद नारे लगाने वालों के पेट भरे हुए हैं. बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.सादर.

Comment by बृजेश नीरज on May 1, 2013 at 10:13pm

आदरणीया मैं गलती कर रहा था और आपको परेशान कर रहा था। आपने मार्गदर्शन दिया इसके लिए आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 1, 2013 at 9:42pm

भावना तिवारी जी रचना को मान देने हेतु दिल से आभार |

Comment by भावना तिवारी on May 1, 2013 at 9:40pm
दूर कहीं से आवाज आ रही है 
मजदूर एकता जिंदाबाद 
मजदूर दिवस की बधाई हो !!!...............ANTIM PANKTIYON MAIN JO KATAAKSH HAI ....WAH MARM BEDHI HAI ....BAHUT SUNDAR RACHNAA ..BADHAI ....

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 1, 2013 at 9:38pm

प्रिय प्राची जी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया ने लेखन को जो मान दिया उस के लिए दिल से आभारी हूँ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2013 at 9:32pm

मजदूर दिवस पर सुन्दर मर्मस्पर्शी क्षणिका के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया राजेश जी..

थोड़ी सी लयात्मकता या प्रवाह की कमी महसूस हुई अभिव्यक्ति में पर कथ्य बहुत समीचीन है और अंत बहुत सशक्त.

पुनः बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 1, 2013 at 9:24pm

ब्रजेश जी यदि जैसे करुँगी तो अर्थ ही बदल जाएगा ----पचास के जैसे चेहरे पर =पचास की उम्र के जैसे चेहरे पर ---ये अर्थ हो जाएगा  आशा करती हूँ की अब शंका का समाधान हो गया होगा 

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