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क्यों नही लिखती तुमको

कविता 
नही लिखती मैं आजकल तुमको
न  मैं नाराज हूँ न व्यस्त
पर
मैंने तुमसे कुछ  दूरी बनाई  है 
क्योंकि 
तुम जब भी मेरे दिल में उतरती हो 
न जाने कितने 
अनुभव और अनुभूति को 
स्पंदित कर देती हो 
और मैं मजबूर हो जाती हूँ 
तुम्हे पूरी संवेदना के साथ 
अपने  शब्दों में रचने को 
और तुम्हे रचते 
तुमसे एकाकार हो लिख देती हूँ 
अपने सारे सुख-दुःख 
पर 
तुम शांत भी तो नही  रहती 
अपने शब्दों की पायल खनका खनका कर 
तुम मेरे  अर्थ बता  देती हो 
और फिर 
शरू होती है 
उनकी व्याख्या ,समीक्षा और टिपण्णी 
जिनका मेरे सन्दर्भों से 
दूर दूर तक कोई मेल नही होता 
और मैं 
हताश बेबस देखती  हूँ 
और सोचती हूँ 
क्या मैंने तुमको इसीलिए रचा ?

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 782

Comment

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Comment by aman kumar on May 23, 2013 at 1:49pm

वाह… बहुत सुन्दर….
लाजवाब…

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 20, 2013 at 11:42pm

भावों को सुन्दर शब्द दिए हैं आदरणीया सदर बधाई स्वीकारें.

Comment by Priyanka singh on May 16, 2013 at 9:16pm

बहुत ही सुन्दर रचना......सादर बधाई हो.......

Comment by दिव्या on May 16, 2013 at 6:59pm

वाह बहुत खूबसूरती से दिल के भावो को शब्दों के जरिये उकेरा है 

Comment by vijay nikore on May 16, 2013 at 6:35pm

आदरणीया पूनम जी:

 

बहुत ही भावपूर्ण सुन्दर रचना ।  निम्नांकित पंक्तियाँ बहुत भाईं...

 

// तुम शांत भी तो नही  रहती 

अपने शब्दों की पायल खनका खनका कर 
तुम मेरे  अर्थ बता  देती हो 
और फिर 
शरू होती है 
उनकी व्याख्या ,समीक्षा और टिपण्णी 
जिनका मेरे सन्दर्भों से 
दूर दूर तक कोई मेल नही होता //
 
बधाई,
विजय निकोर
Comment by राजेश 'मृदु' on May 16, 2013 at 4:40pm

बहुत बधाई इस कविता पर, बहुत ही खूबसूरत विश्‍लेषण आपने किया है

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 16, 2013 at 4:36pm

क्यों नहीं लिखती" का कारण कागज़ पर सबके सामने रखने हेतु लिख दी कविता आपने अपने और ला दिए 

अपने भाव सामने | बधाई पूनम सिंह जी 

Comment by विजय मिश्र on May 16, 2013 at 3:56pm
प्रत्येक सृजनशील मन की यह जाग्रत व्यथा हैं किन्तु विद्युत का उत्सर्जन टकराहटों से ही होता है और सार्थक रचनाओं का जन्म किसी प्रसवा की पीड़ा से कमतर नहीं होता .भाव की अभिव्यक्ति सुन्दर है . साधुवाद पूनमजी .
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 16, 2013 at 2:54pm

बहुत सुंदर
दिल के भावों को सफाह पर उकेर दिया है आपने
सादर बधाई हो

Comment by ram shiromani pathak on May 16, 2013 at 1:25pm

बहुत ही सुन्दर रचना हार्दिक बधाई आपको ///

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