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ठीक ही तो कहा उसने 
क्या दरिद्रों की तरह 
लम्हों के पीले पत्ते 
बटोरती हो और 
और कबाड़ी वाले की तरह 
टेर लगाए फिरती हो 
एहसासों के मोती चुगो 
और राज हंसिनी कहलाओ 
और मैं सोचती हूँ 
उसकी जेब से 
अपने हिस्से की 
अठननी चवन्नी 
झपट कर भाग खड़ी होऊं 
कंजूस एक एक पाई का 
हिसाब रखता है

Gul Sarika 

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Comment by Ashok Kumar Raktale on May 23, 2013 at 11:51pm

दो भिन्न विचारों के टकराव की सुन्दर प्रस्तुति. सुन्दर प्रवाहमयी रचना के लिए सादर बधाई स्वीकारें आदरणीया.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 22, 2013 at 4:54am

कंजूस एक एक पाई का 
हिसाब रखता है

क्या खूबसूरती से कह डाला आपने!

Comment by बृजेश नीरज on May 21, 2013 at 9:47am

बहुत ही सुन्दर! कविता समाप्त होते होते भाव और कहन के चरम पर पहुंच गयी। मेरी बधाई स्वीकारें!

Comment by किशन कुमार "आजाद" on May 20, 2013 at 7:42pm
bahut sundar he
Comment by Abhinav Arun on May 20, 2013 at 3:41pm

आदरणीया सारिका जी , रचना पाठक के मन को अपने साथ उस यात्रा पर ले जाने में सक्षम है जिसका सफ़र वह स्वयं तय करती है , साधुवाद इस प्रवाह और इस भाव भूमि के लिए !!

Comment by Gul Sarika Thakur on May 20, 2013 at 2:28pm

Bahut hi bhagyashaalee hun main jo aap jaise pathak mile ..wastav me dubki lagakar antarnihit bhawon tk pahuchne wale kushal gotakhor hain aap sab.... meri shikayat rahee the hameshaa se apne pathkaon se ..ki wh uthle bhawarth pr apne mantwya dete hain ...sarthak huee meri lekhi ... sahuwaad aap sabhee ko .. Abhara sweekaarain 

Comment by राजेश 'मृदु' on May 20, 2013 at 1:13pm

ऐसा लगता है जैसे किसी अनुभव का अर्द्धांश भर हो पर इसमें अनकहा इतना कुछ है कि उसे ढूंढते-ढूंढते आंखें परेशान हो जाती है, बहुत अच्‍छी रचना है,सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2013 at 12:43pm

आदरणीया गुल सारिकाजी, बड़े मनोयोग से कई दफ़े आपकी रचना को पढ़ गया. अंतर्निहित भाव एकदम से चौंकाते हैं और आपकी कविता आखिर आते-आते बहुत ऊँची हो जाती है.

हृदय से बधाई स्वीकारें.. . शुभकामनाएँ.

Comment by विजय मिश्र on May 20, 2013 at 10:10am
पीले पत्ते , कबाड़ी , चवन्नी-अठन्नी और फिर हिसाबी कंजूस - बहुत ही सफल हैं आप सारिकाजी अपने बिम्बों के रेखांकन में . सचमुच वो तो ऐसा ही है ,अधेली का भी उलट-फेर नहीं होने देता .

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