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ग़ज़ल "बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते"

हो गये सब सर कलम कुछ रोटियों के वास्ते 
जैसे उगते हों शज़र बस आरियों के वास्ते 

दौरे वहशत पूछिए मत, बढ़ रही कैसी हवस 
है परेशां बाप अपनी बच्चियों के वास्ते 

कुछ निवाले छीन लेते हैं गरीबों से भले 
रोज़ दाना लाएं साहब मछलियों के वास्ते 

देश के रक्षक उगाते बेच कर ईमान अब 
नोट की फसलें सियासी इल्लियों के वास्ते 

दौर है रफ़्तार का, फुर्सत नहीं खुद के लिए 
व्यस्त हैं सब कागज़ी कुछ चिन्दियों के वास्ते 

मुल्क की तस्वीर से फिर साजिशी बू आ रही

खुल रहे स्कूल इंग्लिश हिंदियों के वास्ते


कोख में ही मार डालीं, बाप ने सब बच्चियाँ 
मां तरसती रह गई किलकारियों के वास्ते 

क्यूँ गुनाहों से करे तौबा कोई भी “दीप” जब

बह रही गंगा अजल से पापियों के वास्ते

संदीप पटेल "दीप"

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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 29, 2013 at 3:23pm

दीप जी आज की क्रूर व्यवस्था पे चोट करते हुए बेहतरीन ग़ज़ल आपने पेश किया है, वाह तारीफ़                                                        क़ुबूल फरमाएँ

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:33am

आदरणीया गीतिका जी सादर प्रणाम 

आपको ग़ज़ल पसंद आई लेखन सार्थक हुआ 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

सादर आभार आपका 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:32am

आदरणीय अशोक सर जी सादर प्रणाम 

आपकी सराहना हेतु आपका बहुत बहुत आभार 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

सादर 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:29am

आदरणीय धर्मेन्द्र सर जी सादर प्रणाम 

ग़ज़ल को सरहाने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:29am

आदरणीय बृजेश जी सादर 

आपकी सराहना पाकर बहुत ख़ुशी मिली 

ये स्नेह यूँ ही अनुज पर बनाये रखिये 

सादर आभार आपका 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:28am

आदरणीय डॉ आशुतोष सर जी सादर प्रणाम 

इस उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत बहुत आभार 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:27am

आदरणीय केवल प्रसाद जी सादर 

आपकी सराहना सर आँखों 

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

सादर आभार आपका 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:26am

आदरणीय वीनस जी सादर 

आपकी सराहना पाना मेरे लिए उपलब्धि है 

ये स्नेह यूँ ही बनाए रखिये 

सादर आभार आपका 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:24am

आदरणीय नीरज मिश्र जी सादर आभार आपका इस सराहना हेतु 

स्नेह बनाये रखिये 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on May 26, 2013 at 12:23am

आदरणीय अभिनव सर जी सादर 

आपकी प्रतिक्रिया पाकर अभिभूत हुआ 

ये स्नेह यूँ ही बनाये रखिये 

सादर आभार आपका 

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