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हे शान्त स्निग्ध जल की धारा

 

तुम कलकल कलरव की हो गान

हो लिपटे बेलों की वितान

तुम वसुन्धरा की शोभा हो

हे आन मान सरिता महान

तुझमे दिखता जीवन सारा

हे शान्त स्निग्ध जल की धारा

 

तुझमे निज-छवि लखते उडगन

यह विम्ब देख हर्षाता मन

सुषमा ऐसी नयनों मे बसा

रहता बस मे किसका तन मन

दिखता तुझमे चन्दा प्यारा

हे शान्त स्निग्ध जल की धारा

 

हे मिट्टी की सोंधी सुगन्ध

बाँधे सबको जो पाश बन्ध

तुम अद्भुत और अलौकिक हो

बाँधेगी तुमको कौन छन्द

छन्दों की नही ऐसी कारा

हे शान्त स्निग्ध जल की धारा

 

हे रश्मि प्रभा मे श्वेत जाल

अनुपम मनोहारी चन्द्रभाल

उर्वशी रेणुका सी लगती

(तुम स्वयं अप्सरा सी लगती)

यौवन धारे कंचुक विशाल

वह तुमसे कौन नही हारा

हे शान्त स्निग्ध जल की धारा

 

आशीष यादव

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2013 at 10:48pm

बढिया

प्रयासरत रहें आशीष भाई

Comment by आशीष यादव on August 11, 2013 at 2:07pm

आदरणीया Dr.Prachi Singh जी सराहना हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on August 11, 2013 at 2:06pm

आदरणीय Rana Pratap Singh जी, आदरणीय arun kumar nigam  जी, आदरणीय vijay nikore जी, सराहना हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by आशीष यादव on August 10, 2013 at 8:11am

आदरणीय राणा जी, आपका सुझाव सर-आँखों पर।

Comment by आशीष यादव on August 10, 2013 at 8:10am

आदरणीया Vasundhara pandey जी, आदरणीया Meena Pathak जी, aap logo ko kavita pasand aayi, mai dhanya hua. bahut bahut धन्यवाद

Comment by आशीष यादव on August 10, 2013 at 8:07am

आदरणीय 'विजय मिश्र जी, धन्यवाद

Comment by आशीष यादव on August 10, 2013 at 8:06am

आदरणीय जितेन्द्र 'गीत' जी, धन्यवाद

Comment by vijay nikore on August 8, 2013 at 12:33pm

इस अच्छी रचना के लिए साधुवाद, आशीष जी।

 

सादर,

विजय निकोर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 7, 2013 at 10:40am

प्रिय आशीष जी ..बहुत सुन्दर शब्द चयन, सरिता के सौंदर्य का प्रवृत्ति का बहुत सुन्दर चित्रण... हार्दिक बधाई 

*बाँधेगी तुमको कौन छन्द.....यहाँ बाँधेगी उचित नहीं लग रहा, बाँधेगा होना चाहिये..

*कविता में १६ के मात्रिकता का निर्वहन आसानी से किया जा सकता था..

शुभेच्छाएँ 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on August 6, 2013 at 10:49pm

प्रिय आशीष जी, सुकोमल शब्दों में सरिता का सुंदर सौंदर्य-वर्णन हुआ है. बधाई.....आदरणीय राणा जी से सहमति भी रखता हूँ......

कृपया ध्यान दे...

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