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नव गीत --आ चल फिर बच्चे हो जायें ( गिरिराज भंडारी )

नव गीत

*******

आ चल फिर बच्चे हो जायें

खेलें कूदे मौज मनायें

बिन कारण ही,

रोयें गायें , हँसे  हँसायें,

आ चल फिर बच्चे हो जायें !

 

मेरी कमीज़ है गन्दी तो क्या

तू कुछ उजला उजला तो क्या

मिट्टी मे खेलें,

धूल उड़ायें ,

चल हम सब गन्दे हो जायें

आ चल फिर बच्चे हो जायें !!

 

मै दौड़ूं  तू पीछे आये

मुझे धकेले और गिराये

चोट लगे मुझको, मै रो दूँ

तू डर जाये ,

दौड़े दौड़े पास मे आये

मै उठ न पाउँ,

मुझे उठाये ,

घर पहुंचाये ,

मात- पिता की गाली खायें

आ चल फिर बच्चे हो जायें !!!

 

फिर दूजे दिन,

कल को भूलूँ ,

रस्ता देखूँ ,

कि तू आये , मुझे मनाये

मै मानूँ , फिर भागे दौड़ें

फिर मुझे गिराये ,

और उठा के घर पहुँचाये

आ चल फिर बच्चे हो जायें !!!!

मौलिक एवँ अ प्रकाशित

Views: 866

Comment

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Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on September 4, 2013 at 11:21pm

मै उठ न पाउँ,

मुझे उठाये ,

घर पहुंचाये ,

मात- पिता की गाली खायें

आ चल फिर बच्चे हो जायें !!!

आ फिर लौट चलें ....कोई लौटा दे मेरा गुजरा हुआ कल वो प्यारा बचपन ...सुन्दर चित्रण ....गिरिराज जी
बधाई
भ्रमर ५

Comment by मोहन बेगोवाल on September 4, 2013 at 10:59pm

 सर जी,

आप ऊँगली लगा कर हमें भी हमारे बचपन में ले गए -धन्यवाद 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 10:24pm

आदरणीया आन्नपूर्णा जी , उत्साह वर्धन के लिये आपका हार्दिक आभार !!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 10:21pm

अरविन्द भाई , रचना की सराहना के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 10:18pm

आदरणीय आशीष भाई , उत्साह वर्धन के लिये दिली आभार !!

Comment by annapurna bajpai on September 4, 2013 at 10:17pm

आदरणीय भण्डारी जी बहुत सुंदर प्यारा सा नवगीत बचपन मे पहुंचा दिया , बहुत बधाई आपको । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 4, 2013 at 10:15pm

राम शिरोमणी भाई ,आपका हार्दिक आभार !!

Comment by Ashish Srivastava on September 4, 2013 at 9:23pm

हार्दिक बधाई , सुन्दर रचना हेतु 

Comment by ARVIND BHATNAGAR on September 4, 2013 at 9:04pm
Fir duje din /kal ko bhulun/ rasta dekhun /fir tu aaye /mujhe manaye...... Wah wah Giriraj bhai
Comment by ram shiromani pathak on September 4, 2013 at 8:54pm

सुन्दर रचना हार्दिक बधाई आपको आदरणीय गिरिराज जी  ,अपने तो मुझे बचपन की याद दिल दी  //सादर बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ 

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