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वो देश जहाँ नारी महिमा, सदियों से गायी जाती है

वो देश जहाँ नारी महिमा, सदियों से गायी  जाती है । 

द्रौपदी, गार्गी और सीता, की कथा सुनाई  जाती है ॥ 
.
वो देश जहाँ के संस्कारों की, विश्व दुहाई देता है । 
वो देश जहाँ नारी हित में, तलवार उठाई जाती है ॥
.
उस देश की हालत देख के अब, नैनो से नीर टपकता है । 
अबला की लाज  दिए जैसी, हर शाम जलाई जाती है ॥
.
निष्ठुर, निकृष्ट, निर्लज्ज पुरुष, हर द्वार पे पाए जाते है । 
हर रोज  कोई मासूम कली, काँटों पे सुलाई जाती है ॥
.
जिसका हर रूप नए जीवन की, नयी कहानी गढ़ता है । 
उसके जीवन की कदम-कदम पे, बली  चढ़ाई जाती है ॥
.
एक कोख से लेकर जन्म, दूसरी कोख को डसता है निष्ठुर । 
एक बच्ची जनम से पहले यहाँ, सौ बार गिराई जाती है ॥
.
अब और नहीं लिख सकता कुछ, धमनी में रक्त उबलता है । 
वो पीर है दिल में वीर, की अब न कलम चलायी जाती है ॥ 
.
मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 9:14pm

आदरणीय विजय मिश्र जी ... ये रचना स्वतः ही मेरे मन मस्तिष्क हृदय या यूँ कहें की रग रग में आ गयी .... मै  खुद देश के बहार हूँ पर आये दिन ये सब समाचार सुनके मै  विचलित हो जाता था .... कई दोष हैं इस रचना में पर मैंने सिर्फ अपनी भावाभियक्ति की है ..... आपका आभारी हूँ आपको ये रचना पसंद आई ... बहुत शुक्रिया 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 10, 2013 at 8:21pm
अब और नहीं लिख सकता कुछ, धमनी में रक्त उबलता है । 
वो पीर है दिल में वीर, की अब न कलम चलायी जाती है ॥ 
भाव पूर्ण, सत्य पर आधारित रचना 
Comment by विजय मिश्र on September 10, 2013 at 6:49pm
अनिलजी ! संस्कारों के ढहते इस भीत पर आपने करारा चोट करने का प्रयास किया है , इस किंकर्तव्यविमूढ सी दुसह परिस्थितियों में आप जैसे सभी सद्विचारी लोगों की आत्मा इसीप्रकार कचोटती है .सभ्य समाज आकुल है और विवश भी |साधुवाद इस जागृत रचना केलिए |
Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 4:32pm

आदरणीय vijayashree जी बहुत बहुत शुक्रिया .... 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 4:32pm

आदरणीय बसंत नेमा जी बहुत बहुत शुक्रिया .... 

Comment by vijayashree on September 10, 2013 at 3:42pm
जिसका हर रूप नए जीवन की, नयी कहानी गढ़ता है । 
उसके जीवन की कदम-कदम पे, बली  चढ़ाई जाती है ॥
अब और नहीं लिख सकता कुछ, धमनी में रक्त उबलता है । 
वो पीर है दिल में वीर, की अब न कलम चलायी जाती है ॥ 
मार्मिक अभिव्यक्ति अनिल चौहान जी 
हार्दिक बधाई 
Comment by बसंत नेमा on September 10, 2013 at 12:43pm

सुन्दर अति सुन्दर ... सुन्दर अभिव्यक्ति सुन्दर भाव ...बधाई 

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 10, 2013 at 12:36pm

आदरणीय रविकर जी बहुत बहुत शुक्रिया मै  आगे से ध्यान रखूँगा 

Comment by रविकर on September 10, 2013 at 11:04am

मार्मिक-
आभार
कहीं कहीं प्रवाह बाधित हैं-
कोशिश करें-
सादर

कृपया ध्यान दे...

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