For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"डॉ साहिब, हमें बेटी नहीं चाहिए. आप बहू का एबॉर्शन कर दीजिए."
"ठीक है, आप लोग कल शाम मेरे प्राइवेट क्लिनिक पर आ जाईए".
"कल नहीं डॉ साहिब, हम लोग अगले हफ्ते ही आ पाएंगे"
"अगले हफ्ते क्यों ?"
"क्योंकि अभी नवरात्रे चल रहे हैं "

(मौलिक एवँ अप्रकाशित्)

Views: 1236

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 10, 2013 at 11:29am

रचना पसंद करने के लिए सादर आभार आदरणीय विजय निकोर जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 10, 2013 at 11:28am

रचना पसंद करने के लिए सादर आभार सचिन देव जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 10, 2013 at 11:27am

सादर आभार अग्रज लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 10, 2013 at 11:26am

दिल से धन्यवाद कहता हूँ आदरणीय गिरिराज भंडारी जी


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on October 10, 2013 at 11:26am

लघुकथा के मर्म तक पहुँचने हेतु सादर आभार आद०  डी  पी माथुर जी  .

Comment by MAHIMA SHREE on October 6, 2013 at 6:03pm

उफ़ .... भारतीय जनमानस  दर्शन और रहस्यवाद में जितना ही उन्नत है सामजिक और धार्मिक कर्मकांड में उतना ही उल्टा .. आदरणीय योगराज सर  आपकी लघु कथा इस दोगली  मानसिकता की तस्वीर को चंद शब्दों में बिना किसी पात्र के नाम  कितनी खूबसूरती से कह जाती है ...  जितनी भी तारीफ की जाए कम है ..

ह्रदयतल से आपको बधाई आदरणीय सर

Comment by Shubhranshu Pandey on October 6, 2013 at 4:18pm

आदरणीय योगराज जी, सुन्दर कथा.

लड़कियाँ केवल तस्वीरों में ही पसन्द आती हैं. घरों में हो तो परेशानी और बाहर हो तो दूसरों को परेशानी...बहुत बहुत बधाई...

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 4:03pm

आदरणीय सर 

पाखंडी दोहरी मानसिकता के लोगों की सोच की सताहीयता और घृष्टता को दर्शाती सुन्दर सार्थक संदेशपरक लघुकथा.

इस कसी हुई लघुकथा पर हार्दिक बधाई 

सादर.

Comment by Ravi Prabhakar on October 6, 2013 at 12:45pm

श्री योगराज जी,
सादर चरण वंदना ।
    बेहद सटीक और कसे शब्दों से आपने समाज के दोहरे चरित्र का चित्रण किया है। जैसे एकदम से कोई जोरदार पटाखा फूटता है परन्तु उसकी सन्न-सन्न बहुत देर कानों में गूंजती रहती है, यह आपकी लघुकथाओं की विशेष विशेषता होती है। लघुकथा होनी भी ऐसी ही चाहिए।  आप बहुत अल्प शब्दों में अपनी पूरी बात कह जाते हैं ।  भविष्य में भी आप अपनी कृतियों से साहित्य जगत को सराबोर करते रहेंगें इसी दुआ से आपको हृदय से शुभकामनाएं । आपकी और रचनाओं का बेसब्री से इंतजार रहेगा।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 6, 2013 at 10:43am

आदरणीय गुरुदेव, आपकी लघुकथायें हम लोगो के लिए शो रूम में रखे नमूनों की भाति होती है, कम शब्दों में कैसे उन बातों को आप समेटते हैं जिन्हें लिखने के लिए कई पन्नों की आवश्यकता हो । 

अभिभूत हूँ इस लघुकथा को पढ़कर, बहुत बहुत बधाई आदरणीय । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
19 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
22 hours ago
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service