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सवाल --गजल --उमेश कटारा

2122 2121 222

आप तो सचमुच कमाल करते हो
बेवफा होकर सवाल करते हो

जंग में तो हार जीत जायज है 
हारने का क्यों मलाल करते हो

क्या हुआ जो बेवफा मुहब्बत थी
मुद्दतों से ही बवाल करते हो

.

पत्थरों के शह्र में बसर है तो
क्यों बिखरने का ख़याल करते हो

.

आदमी तो मर गया कभी से था

आत्मा को भी हलाल करते हो

उमेश कटारा

मौलिक एंव अप्रकाशित रचना

Views: 761

Comment

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Comment by विजय मिश्र on November 11, 2013 at 5:40pm
"जंग में तो हार जीत जायज है
हारने का क्यों मलाल करते हो |" उमेशजी ,यहाँ आपने बहुत प्यारे लहजे में जमीनी बात काएदे से रखी भाई , बधाई .
Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 10, 2013 at 9:38pm

बहुत ख़ूब .. बधाई ... गुरुजनों ने उचित मार्गदर्शन किया ही है ...

Comment by ram shiromani pathak on November 10, 2013 at 8:17pm

आदरणीय उमेश जी,सुन्दर प्रस्तुति...........हार्दिक बधाई

Comment by मोहन बेगोवाल on November 10, 2013 at 7:38pm

आदरणीय उमेश जी, उम्दा गजल के लिए बधाई हो 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 10, 2013 at 8:44am

आदरणीय उमेश जी, आपको शायद पहली बार सुनने का सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूँ. वाह !!!!!!!!!!!!

सादगी में भी कमाल करते हो

धूल को भाई गुलाल करते हो.............

बधाइयाँ..................... 

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 8:51pm

इस सफलतम प्रयास हेतु हार्दिक बधाई आ0 उमेश जी.....

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 9, 2013 at 5:27pm

आदरणीय ग़ज़ल पर बहुत ही अच्छा प्रयास हुआ है आदरणीया राजेश माँ जी के कहे पर ध्यान दें शेर नंबर ०४ में तकाबुले रदीफ़ का दोष है. इस प्रयास हेतु बधाई स्वीकारें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 8, 2013 at 10:19pm

आप तो सचमुच कमाल करते हो-----बहुत सुन्दर मतला 
बेवफा होकर सवाल करते हो

जंग में तो हार जीत जायज है 
हारने का कितना मलाल करते हो----हारने का क्यों मलाल करते हो ---करेंगे तो बहर सही हो जायेगी 

क्या हुआ जो बेवफा मुहब्बत थी
मुद्दतों से उसका बवाल करते हो----मुद्दतो से ही बवाल करते हो ---करके देखिये ---उसका को आपने सिर्फ २ मात्रा में बाँधा है 

.

पत्थरों के शह्र में बसर है तो
क्यों बिखरने का ख़याल करते हो

.

आदमी तो मर गया कभी से था

आत्मा को भी अब हलाल करते हो----आत्मा को भी हलाल करते हो ----अब हटा दीजिये फ़ालतू है 

बहुत बढ़िया ग़ज़ल बन रही है दाद कबूलें बस उपर्युक्त सुधार कर लें. 

कृपया ध्यान दे...

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