For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1. लच्छो

लच्छो तेरा प्यार अब, रग दौड़े बन खून ।
हृदय की तू ही कंपन, तुझ बीन सब शून ।।
तुझ बीन सब शून, प्यार जीवन संवारे ।
तू प्यार की मूरत, प्रेम का मै  मतवारे ।।
तन तेरा चितचोर, मन की तुम तो सच्चो ।
तू जीवन संगनी, मेरी दुलारी लच्छो ।


2.   नेता कहे

सारे नेता कह रहे,  अब ना होंगे दीन।
मिट जायेंगे दीनता, हम से रहो न खिन्न ।।
हम से रहो न खिन्न, कुर्सी हमको दिलाओ ।
मुफ्त में सब देंगे, कटोरा तुम ले आओ ।।
करना मत कुछ काम, आओ तुझे संवारे ।
मुफ्तखोर हो दीन, प्रयास करेंगे सारे ।।

3. भाग्य चमकाओ

अपना अपना भाग्य है, काहे कोई रोय ।
ऐसे भाग्यशली तो, कोई कोई होय ।
कोई कोई होय, जो बीन मांगे पाये ।
समय अर्थ सम्मान, छप्पड़ फाड़ के आये ।।
स्वार्थ की राजनीति, दिखाये ऐसा सपना ।
रहो सदा अनुकूल, भाग्य चमकाओ अपना ।।

........................................................

मौलिक अप्रकाशित

Views: 506

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 20, 2013 at 4:08pm

छंदों पर प्रयास करना सही है... पर शिल्प निभाते हुए शब्दों और भाषा व्याकरण पर भी ध्यान देना ज़रूरी है 

 

कुण्डलिया छंद तो ओबीओ के सर्वप्रिय छंदों में से एक है, आपको मंच पर कई उन्नत उदाहरण व आलेख मिलेंगे इस छंद पर..उन सबको ध्यान से देखते चलें...

छंद पर इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by ram shiromani pathak on November 19, 2013 at 10:59pm

सुन्दर प्रयास हुआ है आदरणीय बधाई  आपको///सादर 

Comment by रमेश कुमार चौहान on November 19, 2013 at 10:55pm
आदरणीय गुरु जनो आत्मीयजनों आप सभी ने भाव पक्ष को मान देते हुये शिल्प ध्यान देने कहा है । सिरोधार्य है ।
आप सभी का आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 19, 2013 at 9:42pm

आदरणीय रमेश जी, कुण्डलिया छंद विधान पर पुन: दृष्टिपात करें.शेष आदरणीय सौरभ जी ने कह ही दिया है............


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 8:56pm

आप इस मंच पर एक अरसे से हैं अब. कई छंदोत्सव आयोजन सम्पन्न हो चुके हैं आपके सामने न !
आप छंद पर काम कररहे हैं यह देख कर आत्मीय सुख हुआ है. लेकिन छंदो के नियम पर आग्रही बनना पड़ेगा.
शुभकामनाएँ

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 19, 2013 at 1:38pm

chauhan jee 

aap se bhavanugaminee shilp kee apechcha hai  ssneh

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 19, 2013 at 12:46pm

आदरणीय रमेश जी सादर

आपकी इस प्रस्तुति के भाव पक्ष के लिए बहुत बहुत बधाई

किन्तु शिल्प की दृष्टि से बहुत त्रुटियाँ हैं

गुरुजन इस पर अपनी राय अवश्य रखेंगे

सादर शुभकामनाएं

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service