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शायद प्रेम वही कहलाये.....(अरुण कुमार निगम)

पूर्ण शून्य है,शून्य ब्रह्म है

एक अंश सबको हर्षाये

आधा और अधूरा होवे,

शायद प्रेम वही कहलाये

 

मिट जाये तन का आकर्षण

मन चाहे बस त्याग-समर्पण

बंद लोचनों से दर्शन हो

उर में तीनों लोक समाये

 

उधर पुष्प चुनती प्रिय किंचित

ह्रदय-श्वास इस ओर है सुरभित

अनजानी लिपियों को बाँचे

शब्दहीन गीतों को गाये

 

पूर्ण प्रेम कब किसने साधा

राधा-कृष्ण प्रेम भी आधा

इसीलिये ढाई आखर के

ढाई ही पर्याय बनाये .....

 

अरुण कुमार निगम

आदित्य नगर, छत्तीसगढ़

[मौलिक व अप्रकाशित]

Views: 871

Comment

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Comment by vijay nikore on December 1, 2013 at 10:41am

क अनुभूत सत्य को प्रकाशित करती जीवंत रचना ।

हार्दिक बधाई, आदरणीय अरुण निगम जी।

सादर,

विजय निकोर

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on November 23, 2013 at 12:28am

बधाई अरुण भाई सुंदर रचना की। सच ही कहा प्रेम कभी पूर्ण नही हो पाता ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 22, 2013 at 1:52am

आदरणीय अरुणभाई जी, तत्त्वबोध के प्रति आपका आग्रह रुचिकर लगा. सुन्दर प्रस्तुति हुई है, बधाई..

Comment by hemant sharma on November 22, 2013 at 12:06am

आदरणीय आपको सदस्य कार्यकारिणी बनने के लिये भी शुभकामनाये एवम बधाई..

Comment by hemant sharma on November 21, 2013 at 11:57pm

बहुत हि सुन्दर रचना आदरणीय निगम सर बधाई स्वीकारें......

 

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on November 21, 2013 at 9:42pm

वाह ! और वाह ! मधुरतम 

दिली मुबारकबाद के सच्चे हक़दार है आप 

Comment by विजय मिश्र on November 21, 2013 at 6:26pm
भव्य और गुढ़ तत्वों को समझाती इस सुंदर रचना के लिए अनेक बधाई अरुणजी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 21, 2013 at 4:34pm

आदरणीय अरुण निगम भाई , बहुत अद्भुत , बहुत सुन्दर बातें कही है प्रेम के ऊपर !!! सुंदर रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 21, 2013 at 11:49am

वाह वाह आदरणीय गुरुदेव श्री बहुत ही सुन्दर सुमधुर मनोहारी गीत प्रस्तुत किया है आपने पढ़कर मन तृप्त हो गया हृदयतल से बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by Saarthi Baidyanath on November 21, 2013 at 11:26am

ह्रदय आनंदित हो उठा ...पठनीय रचना ..वाह !

आधा और अधूरा होवे,

शायद प्रेम वही कहलाये....बेजोड़ 

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