For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गूँजी फिजाएं ......................डॉ० प्राची

वर्जना के टूटते

प्रतिबन्ध नें- 

उन्मुक्त, भावों को किया जब, 

खिल उठीं

अस्तित्व की कलियाँ 

सुरभि चहुँ ओर फ़ैली, 

मन विहँस गाने लगा मल्हार...

...फिर गूँजी फिजाएं 

जब सरकता चाँद पूनम

छत चढ़ा,

तारों नें झिलमिल 

दीप उत्सव में जलाए, 

प्राण प्रिय नें

हाथ थामा, 

सिहरते पल नें किया शृंगार...

..फिर गूँजी फिजाएं 

बधिर साँकल,

बंद खिड़की

ख्वाब की - घुटती सिसकती, 

ले कहीं से

अंजुरी भर 

हौसले की रश्मियों को,

जब खुली, पा नभ तलक विस्तार...

..फिर गूँजी फिजाएं 

Views: 1451

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 22, 2013 at 2:29pm

अभिव्यक्ति सन्निहित कल्पना को पसंद करने के लिए सादर धन्यवाद आ० डॉ ० गोपाल श्रीवास्तव जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 22, 2013 at 2:27pm

रचना पर आपके सकारात्मक उत्साहवर्धक अनुमोदन के लिए सादर धन्यवाद आ० अखिलेश श्रीवास्तव जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 22, 2013 at 2:25pm

प्रिय गीतिका जी 

इस नवगीत पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रया के लिए सस्नेह धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 22, 2013 at 2:24pm

आदरणीय शिज्जू शकूर जी 

अभिव्यक्ति की सराहना के लिए हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 22, 2013 at 1:51pm

वाह वाह बहुत ही सुन्दर नवगीत लिखा है आपने अद्भुत भावों को समेटे हर बंद चमत्कारी सा लगता है

इस सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारिये आदरणीया

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 22, 2013 at 1:48pm

अत्यंत मनमोहक,बेहद  सुंदर भाव लिए  हुयी अनुपम रचना, हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीया डा. प्राची जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 22, 2013 at 1:44pm

बधिर साँकल,

बंद खिड़की

ख्वाब की - घुटती सिसकती, 

ले कहीं से

अंजुरी भर 

हौसले की रश्मियों को,

जब खुली, पा नभ तलक विस्तार...

..फिर गूँजी फिजाएं --वाह जैसे मुक्त हुए हों सब हृदय के उद्दगार ,बहुत शानदार पंक्तियाँ ,बार बार पढने को मन करता है ,बहुत- बहुत बधाई आपको प्रस्तुति पर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 22, 2013 at 1:19pm

अहा! अहा! अत्यंत मधुरिम नवगीत वाह पंक्तियों के गहरे भाव से उठती लहरें ह्रदय को स्पर्श कर सुखद अनुभूति का एहसास करवा रही हैं. इस सुन्दर सुमधुर मनोहारी गीत हेतु हृदयतल से बधाई स्वीकारें दीदी.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 22, 2013 at 12:45pm

वर्जना के टूटते
प्रतिबन्ध नें-
उन्मुक्त, भावों को किया जब,
खिल उठीं
अस्तित्व की कलियाँ
सुरभि चहुँ ओर फ़ैली,
मन विहँस गाने लगा मल्हार...
...फिर गूँजी फिजाएं
उपरोक्त पंक्तियाँ अपने आप अप्रतिम भावोद्गार हैं. अस्तित्व की कलियों  से जिस अदम्य साहस को समर्थन मिला है वह बहुत ही संतोष देता है. 

बधिर साँकल,

बंद खिड़की

ख्वाब की - घुटती सिसकती,

हम्म .. ये ब्बात ...  :-))))))))))

नवगीत की कड़ियों के सिरों को एक विन्दु और आगे बढ़ाती इस प्रस्तुति पर अतिशय बधाइयाँ, डॉ. प्राची.

यह अवश्य है कि रचनाओं की कायिक चाहना भी कभी-कभी आग्रही हो उठती है उस दशा में रचनाकार को उन्हें संतुष्ट करना आवश्यक हो जाता है. मेरा इशारा  तारों नें झिलमिल / दीप उत्सव में जलाए  पंक्ति को लेकर है. गेयता बाधित हुई कहना मात्र अपेक्षित नहीं है. बल्कि मैं आपसे साझा करना चाहूँगा कि हम अब इस तथ्य पर ध्यान दें कि गेयता क्यों बाधित हुई या क्या हुआ है कि गेयता बाधित प्रतीत हो रही है.


वैसे आपकी वैचारिकता और प्रयुक्त शब्दों के प्रति ठोस व्यवहार अत्यंत उच्च स्तर के होते हैं, अतः अक्षरियों पर किसी विवाद को मैं अधिक तरज़ीह नहीं दूँगा.
इस उन्नत भावदशा के लिए सादर बधाइयाँ.
 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 22, 2013 at 12:21pm

आदरणीया प्राची जी ..सम्पूर्ण गीत मनमोहक है ..चुनिन्दा बेहतरीन शब्द समायोजन इसमें चार चाँद लगाता है ..हमेशा की तरह आपकी यह रचना भी लाजवाब है ..इस सुंदर रचना पर मेरी तरफ से हादिक बधाई स्वीकार करें ..सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service