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कविता (कल्पना मिश्रा बाजपेई)

बाबुल,मेरा मन आज भयो जैसे पाखी

जो मैं होती बाबा तेरे घर गौरैया

नित आंगन तेरे आती

जो मैं होती बाबा तेरी खरक की गैया 

नित खरक में दर्शन तेरे पाती

जो मैं होती बाबा तेरे द्वार निमरिया

नित शीतल छाँव बिछाती

जो मैं होती बाबा तेरे सिर का साफा

नित धूप से तुम्हें बचाती

जो मैं बाबा शगुन चिरैया

नित मीठे गीत सुनाती

मेरा मन आज भयो जैसे पाखी

मैं तो भई बाबा बेमन बिटिया

दूर देश जाके ब्याही 

मन ही मन उकलाती

नित अखियन नीर बहाती

मेरो मन आज भयो जैसे पाखी

कल्पना मिश्रा बाजपेई

(मौलिक और अप्रकाशित) 

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Comment

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Comment by kalpna mishra bajpai on February 23, 2014 at 10:14am

आप सब गुणी जनों की हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया ........।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 5, 2014 at 5:07pm

बिटिया चिरैया सी दूर देश जा...बाबा के आँगन को स्वप्न में ही अपना पाती है 

सुन्दर मर्मस्पर्शी भाव रचना के 

हार्दिक बधाई 

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 5, 2014 at 9:24am

भावनाओं की मार्मिक अभिव्यक्ति.....................

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 4, 2014 at 11:28pm

बेटी की भावनाओं को बहुत सुन्दरता से संजोया है आपने, हार्दिक बधाई आदरणीया कल्पना जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 4, 2014 at 6:46pm

आदरणीया कल्पना जी , एक बेटी जी आंतरिक भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति हुई , आपको बधाई ॥

Comment by kalpna mishra bajpai on February 4, 2014 at 1:59pm
आप सब का बहुत-बहुत आभार।
Comment by Anita Maurya on February 4, 2014 at 1:19pm

बहुत ही सुन्दर रचना कल्पना जी , आँखें नम हो गयीं।  

Comment by Meena Pathak on February 4, 2014 at 1:09pm

कल्पना जी आप की रचना पढ़ कर मन और आँखे दोनों भीग गयीं , बहुत बहुत बधाई और तहेदिल से स्वागत 

Comment by अनिल कुमार 'अलीन' on February 4, 2014 at 11:45am

एक बेटी की भावनाओ की सुन्दर, सहज एवं सरल अभिव्यक्ति ................बहुत ही अच्छा लगा................

Comment by coontee mukerji on February 4, 2014 at 3:06am

कल्पना जी....आपका स्वागत है. बहुत  सुंदर रचना है. हार्दिक बधाई. सादर

कृपया ध्यान दे...

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