For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रिपोर्ट :- आचार्य का बाण भट्ट काशी में

रिपोर्ट :- आचार्य का बाण भट्ट काशी में

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का 'रंगमंडल' इन दिनों काशी में है | ०९ और १० फरवरी २०११ को एम.के.रैना के निर्देशन में "बाण भट्ट की आत्मकथा "का मंचन किया गया | नागरी नाटक मंडली के प्रेक्षागृह में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की इस कालजयी रचना को कलाकारों ने जीवंत कर दिया |प्रकाश और ध्वनि तथा संगीत संयोजन उत्कृष्ट रहा | बनारस में नाटक के सुधि दर्शक हैं यह उपस्थित भीड़ बता रही थी | सभागार में कई बार तालियों की गडगडाहट भी गूंज जाती |

११ और १२ को रंगमंडल विजय तेंदुलकर का नाटक 'जात ना पूछो साधु की 'का मंचन करेगा |इसका निर्देशन राजिंदर नाथ ने किया है |

नाटक देखने घर से कल शाम निकला तो एक जगह मुख्यमंत्री के दौरे के कारण सड़क प्रशासन द्वारा रोक दी गयी थी | जनता के बीच चर्चा सुनी की एक काशी के प्रधान मंत्री थे लाल बहादुर शास्त्री जिनकी सादगी की चर्चा के किस्से मशहूर हैं | प्रधान मंत्री बनने की बाद भी जिन्होंने एक कार नहीं खरीदी | जिनके रूस दौरे पर जाने के लिये एक कोट तक नहीं था | और जो प्रधान मंत्री बन दिल्ली जाने लगे तो पुराने कपडे वगैरह देकर अपनी धर्म पत्नी को सिल टाँक कर ठीक करने को कहा |... आज जनता से ही उसके चुने नेताओं को खतरा है ...|

Views: 560

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on February 13, 2011 at 12:44pm
"जाति ही पूछो साधु की " कल देखी रंगमंडल की प्रस्तुति | राजिंदर नाथ के निर्देशन में विजय तेंदुलकर का नाटक निखर कर सामने आया | महिपत थर्ड डिविजन एम् ए पास होकर किन खयालातों में डूबता उतराता है और नौकरी ढूँढने और करने के दौरान किन किन विसंगतियों से गुजरता है इसका व्यंग्यपूर्ण चित्रण हुआ है इसमें | एन एस डी की प्रस्तुति नाम के अनुरूप रही | कलाकारों का अभिनय सराहनीय रहा संगीत और प्रकाश संयोजन भी बढ़िया |बनारस के दर्शकों ने भी इन प्रस्तुतियों को सराहा |
Comment by Abhinav Arun on February 13, 2011 at 12:11pm
आभार अभय कान्त जी आप विचारों से मेरे साथ हैं ,बल मिला.. सही कहा हम तो कलम कार ठहरे |
Comment by Abhay Kant Jha Deepraaj on February 13, 2011 at 3:11am
Arun Kumar Jee,  Gandhi aur shaastri jaise neta ve the jo apne kartavyon ke bojh ko naitik jimmedaree samajhte the. Isliye samaaj ke beech ve us bhaav ke saath chalte the jaise ki parivaar kaa mukhiyaa apne ghar ke aangan mein ghoomataa hai. Yahaan mukhiyaa ko apne parivaar se koi bhay naheen honaa swbhaavik hai kintu aaj ke adhiktar netaa aise daaku hain jo yah jaante hain ki janataa unke har apraadh se parichit hai. Isliye unhen yah dar hai ki jis ghadi janataa ke naitik kartavyaa bodh kee bhavnaa jag jayegee, unkee durdashaa ho jayegee, Isee kaaran ve surakshaa ke ghere mein munh chipaaye phirte hai kintu unhen itihaas ke un pannon se seekh lenaa chaahiye jisme aise gheron ke tootne kee aik naheen balki anek kahaniyaan likhee huyee hai. Khair is ghatanaa ke liye jab tak hamaaraa samaaj aikjut naheen hai tab tak to shaayad yahee sambhav hai ki ham sab apnee - apnee kalam kee taan se us aiktaa ke liye samaaj ko jagaane kee koshish karte rahen. Abhay Deepraaj
Comment by Abhinav Arun on February 12, 2011 at 7:30am
आज " जात ही पूछो साधू की "देख सका तो कल विचार शेयर करूँगा |
Comment by Abhinav Arun on February 12, 2011 at 7:27am
रंगमंडल की ख्याति के अनुरूप रही प्रस्तुति | बाण भट्ट और निपुनिया की भूमिका कलाकारों ने बखूबी निभाई |संगीत और मंच सज्जा आकर्षक और समयानुकूल रही | प्रकाश में शायद इस प्रेक्षागृह की अपनी सीमाएं हैं | पर कुलमिलाकर वाह वाह !!!
Comment by Dr Nutan on February 11, 2011 at 4:26pm
सोच में डालने वाली बात .. और रंग मंचन कैसा रहा ... सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service