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इधर-उधर की न कर, बात दिल की कर साक़ी

सुहानी रात हुआ करती मुख़्तसर साक़ी ||

खिला-खिला है हर इक फूल दिल के सहरा में
तुम्हारे इश्क़ का कुछ यूँ हुआ असर साक़ी ||

अजीब दर्दे-मुहब्बत है ये शकर जैसा
जले-बुझे जो सितारों सा रातभर साक़ी ||

उतार फेंक हया शर्म के सभी गहने
कि रिस न जाए ये शब, हो न फिर सहर साक़ी ||

है बरकरार तेरा लम्स* मेरे होंठों पर
कि जैसे ओंस की इक बूँद फूल पर साक़ी ||

ख़ुदा से और न दरख़ास्त एक तेरे सिवा
तेरी निगाह में हो ज़िन्दगी बसर साक़ी ||

लम्स - स्पर्श

अरकान - १२१२ ११२२ १२१२ ११२/२२
(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by Satyanarayan Singh on May 23, 2014 at 5:06pm

हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 14, 2014 at 5:11pm

बढिया..

Comment by MAHIMA SHREE on May 10, 2014 at 1:12pm

खुबसूरत रूमानी ग़ज़ल के लिए बहुत -२ बधाई आपको आ, आशीष जी /

Comment by भुवन निस्तेज on May 7, 2014 at 1:20pm

है बरकरार तेरा लम्स* मेरे होंठों पर
कि जैसे ओंस की इक बूँद फूल पर साक़ी ||

बेहद उम्दा आदरणीय...

बधाई हो...

Comment by Arun Sri on May 6, 2014 at 10:31am

सुहानी रात हुआ करती मुख़्तसर साक़ी ..................... ये तो उकसाने वाली बात हुई भाई ! :-))) बेहद रूमानी !

है बरकरार तेरा लम्स* मेरे होंठों पर
कि जैसे ओंस की इक बूँद फूल पर साक़ी ................... उस रेशमी स्पर्श को बहुत कम उम्र कर दिया आपने ! सिर्फ भोर तक !!! अभी तो पूरी दोपहर सर पर है , बचाकर रखते ! :-)))

बेहतरीन गज़ल हुई है !

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 6, 2014 at 10:19am

दिल में बस्ने वाली ग़ज़ल हुई , आशीष भाई .हार्दिक बधाई .

है बरकरार तेरा लम्स* मेरे होंठों पर
कि जैसे ओंस की इक बूँद फूल पर साक़ी | ...............इस शे'र के तो क्या कहने .

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on May 5, 2014 at 8:41pm

शुक्रिया आदरणीय गिरिराज जी, आदरणीया कल्पना जी, आदरणीया माहेश्वरी जी !!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on May 5, 2014 at 8:39pm

शुक्रिया आदरणीया कुन्ती जी, आदरणीय जितेंद्र जी, आदरणीया विंदू जी !!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on May 5, 2014 at 8:38pm

तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय अखिलेश जी, आदरणीय आशुतोष जी, आदरणीय उमेश जी !!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on May 5, 2014 at 8:37pm

शुक्रिया भाई धर्मेन्द्र जी, शुक्रिया आदरणीया मीना जी !!

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"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, अच्छी ग़ज़ल कही है, दाद कुबूल करें ।"
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dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"ग़ज़ल 1212 1122 1212 22 जुनूँ गज़ब का मगर ये अज़ब कहानी है तलाश जारी है क्या चाँद में भी पानी है इधर…"
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन बाल गीत, बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय सतविन्द्र सरजी। "
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Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"सराहना हेतु आभार आदरणीया बबिता गुप्ता जी."
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मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आभार आदरणीय डॉ छोटे लाल जी, सराहना से रचना सार्थक हुई."
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ, आदरणीय गणेश सरज बधाई स्वीकार कीजिएगा।"
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अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीया  बबिताजी हृदय से धन्यवाद आभार आपका"
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"बेहतरीन पंक्तियाँ चांद को परिभाषित करती,बधाई स्वीकार कीजिएगा आदरणीय लक्ष्मण सरजी। "
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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"स्नेह के साथ हिम्मत बंधाती पंक्तियाँ आदरणीया प्रतिभा दी बधाई स्वीकार कीजिएगा ।"
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