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कुंडलिया छंद - लक्ष्मण लडीवाला

गांधी जी की कल्पना, हो सकती साकार, 

राम राज्य इस देश में, ले सकता आकार |

ले सकता आकार, करे सब मिल तैयारी

मन में हो संकल्प,नहीं फिर मुश्किल भारी

लक्ष्मण कर विश्वास,चले अब ऐसी आंधी

भ्रष्ट तंत्र हो नष्ट, तभी खुश होंगे गांधी ||

(4)

ऊँचा कद इंसान का, नहीं ह्रदय में भाव 
कागज़ खुशबू दे नहीं, दिखे नहीं सद्भाव | 
दिखे नहीं सद्भाव, स्नेह हिवडे से मिलता
नेह न बरसे भाव, प्यार फिर कैसे टिकता
लक्षमण करे न काम,तभी मस्तक हो नीचा 
माँ को आवे लाज, झुका सिर करे न ऊँचा |

(मौलिक व अप्रकाशित)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 3, 2014 at 11:56am

पहली कुण्डलिया अत्यंत प्रभावी बन पडी है, आदरणीय.

दिल से बधाई लें.

 

दूसरी कुण्डलिया से निम्नलिखित पदों के भाव स्पष्ट नहीं हुए.

दिखे नहीं सद्भाव, स्नेह हिवडे से मिलता
नेह न बरसे भाव, प्यार फिर कैसे टिकता
लक्षमण करे न काम,तभी मस्तक हो नीचा 
माँ को आवे लाज, झुका सिर करे न ऊँचा |

सादर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 28, 2014 at 7:16pm

कुंडलिया छंद पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री गिरिराज भंडारी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 28, 2014 at 7:15pm

छंद पसंद करने के लिए आभार आपका श्री बृजेश नीरज जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 28, 2014 at 7:14pm

हार्दिक आभार श्री आशुतोष मिश्रा जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 27, 2014 at 9:18pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , दोनो कुंडलिया लाजवाब हैं , बधाइयाँ ॥

Comment by बृजेश नीरज on May 27, 2014 at 7:40pm

बहुत सुन्दर! आपको बहुत-बहुत बधाई!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 27, 2014 at 9:27am

बिलकुल सही कहा आपने | छंद सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री सुरेन्द्र कुमार शुक्ला भ्रमर जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 27, 2014 at 9:25am

आपका हार्दिक आभार श्री रमेश कुमार चौहान जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 26, 2014 at 3:33pm

आदरणीय लक्षमन जी सुंदर कुण्डले के लिए तहे दिल बधाई सादर

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 26, 2014 at 3:08pm

मन में हो संकल्प,नहीं फिर मुश्किल भारी

लक्ष्मण कर विश्वास,चले प्रगति की आंधी

भ्रष्ट तंत्र हो नष्ट, तभी प्रसन्न हो गांधी ||

सुन्दर रचना और अच्छा सन्देश ...आदरणीय लडीवाला जी काश ऐसा संकल्प सब लें
भ्रमर ५

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