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बहेलिया और जंगल में आग .. :नीरज

जब जब जागी उम्मीदें ,

अरमानों ने पसारे पंख.

देखा बहेलियों का झुंड, 

आसपास ही मंडराते हुए,

समेट  लिया खुद को

झुरमुटों के पीछे.

अँधेरा ही भाग्य बना रहा.

हमारे ही लोग,

हमारे जैसे शक्लों वाले,

हमारे ही जैसे विश्वास वाले,

करते रहे बहेलियों का गुण गान.

उन्हें बताते रहे हमारी कमजोरियों के बारे में

बहेलिये भी हराए जा सकते हैं.

कभी सोचा ही नहीं .

उनकी शक्ति प्रतीत होती थी अमोघ.

जंगल में लगी आग में देखा

बहेलिये को भयाक्रांत

जान बचाकर भागते हुए

बहेलिया भी डरता है,

वह हराया जा सकता है.. 

उठा लिया एक लुआठी.

सबने कहा यह गलत है..

बहेलिये को डराना है अनैतिक.

हम हैं इतने ज्यादा , बहेलिये इतने कम

पर धीरे धीरे जमा होने लगे सभी

बन गयी एक लम्बी श्रृंखला लुआठियों की

भयमुक्त जीना

अपनी संततियों के सुखद भविष्य देखना

अच्छा लगता है .   

अच्छे दिन आ गए.

 

….

नीरज कुमार नीर

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on June 1, 2014 at 11:29am

आदरणीय श्याम नारायण वेरमा साहब हार्दिक आभार..

Comment by Neeraj Neer on June 1, 2014 at 11:26am

आदरणीय गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहब सराहना एवं प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद ..

Comment by Vindu Babu on May 27, 2014 at 11:19pm

अच्छे दिन आ गये :) :)

सटीक अभिव्यकि की है आपने।

हार्दिकशुभकामनायें आपको।

साद्र


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 27, 2014 at 9:38pm

अच्छे दिनों की इन्तजार तो सभी को रहती है ...अच्छी रचना ..बधाई आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 27, 2014 at 9:16pm

आदरणीय नीरज भाई , सुन्दर , प्रेरक , उत्साह वर्धक रचना के लिये आपको बधाइयाँ ।

Comment by बृजेश नीरज on May 27, 2014 at 7:39pm

अच्छी रचना है! अच्छे दिनों की उम्मीद सबको है! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Meena Pathak on May 27, 2014 at 4:14pm

अच्छा लगता है .   

अच्छे दिन आ गए....................///

बहुत सुन्दर  ,, बधाई 

 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 26, 2014 at 9:24pm

जंगल में लगी आग में देखा
बहेलिये को भयाक्रांत
जान बचाकर भागते हुए
बहेलिया भी डरता है,
वह हराया जा सकता है..
समयानुकूल उत्तम प्रस्तुति!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 26, 2014 at 3:40pm

नीरज जी ..बहुत ही सुंदर बिचार ..वाकई कमाल की रचना ..नव चेतना का संचार करती इस रचना के लिए सादर बधाई

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 26, 2014 at 3:07pm

जंगल में लगी आग में देखा

बहेलिये को भयाक्रांत

जान बचाकर भागते हुए

बहेलिया भी डरता है,

वह हराया जा सकता है.. 

सुन्दर रचना और अच्छा सन्देश ...जोश हो धैर्य हो तो कुछ भी हो सकता है
भ्रमर ५

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