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सोच बदलेगी न जब तक.........अरुण कुमार निगम

संस्कारों की कमी से , मनचले होते रहेंगे
कुछ न बदलेगा जहां में , हादसे होते रहेंगे.


दोष इसका दोष उसका मूल बातें गौण सारी
तालियाँ जब तक बजेंगी , चोंचले होते रहेंगे .


मौन धरने उग्र रैली , जल बुझेगी मोमबत्ती
आड़ में कुछ बाड़ में कुछ सामने होते रहेंगे .


आबकारी लाभकारी लाडला सुत है कमाऊ
और  भी  तो  रास्ते  हैं , फायदे  होते रहेंगे .


ये गवाही वो गवाही, है बहुत ही चाल धीमी
जानता  है  हर  दरिंदा , फैसले  होते  रहेंगे.


अश्क हैं घड़ियाल जैसे दाँत हाथी की तरह दो
रंग  गिरगिट सा  बदलते  वो  हरे  होते रहेंगे .


ठोस दावे ठोस वादे, ढोल-सी आवाज इनकी
सोच बदलेगी न जब तक,खोखले होते रहेंगे.

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 7, 2014 at 1:10pm

आड़ में कुछ बाड  में कुछ सामने होते रहेंगे i

बहत खूब आदरणीय  i  लाजवाब i  सादर i


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 7, 2014 at 12:51pm

सामयिक सामाजिक विसंगतियों के परिपेक्ष में बहुत सार्थक प्रस्तुति आदरणीय अरुण निगम जी 

हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 7, 2014 at 11:25am

बहुत सुन्दर वाह ....उत्कृष्ट व्यंगात्मकता लिए हुए आपकी ये प्रस्तुति ...जितनी तारीफ़ की जाए कम ही होगी .बधाई बधाई ..

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 7, 2014 at 10:35am

बिलकुल सही फरमाया है आपने, श्री अरुण कुमार निगम जी!

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