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अंतःकरण की शुद्धि

अंतःकरण की शुद्धि

सुबह में , शाम में,
वर्षा और घाम में,
जीवन के साम-दाम में,
अंतःकरण की शुद्धि चाहिए,

देवता के पूजन में ,
मन्त्रों के गुंजन में,
सज्जन और दुर्जन में,
अंतःकरण की शुद्धि चाहिए,

राग-वैराग्य में,
स्वार्थ और त्याग में ,
जीवन सौभाग्य में,
अंतःकरण की शुद्धि चाहिए,

दुःख में क्लेश में
किसी भी वेश में ,
दुर्भाग्य और भाग्य में,
अंतःकरण की शुद्धि चाहिए,

डॉ. विजय प्रकाश शर्मा
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 22, 2014 at 9:57am

सच कहा आपने आदरणीय विजय जी, बिना शुद्धि के सही निर्णय भी नही ले सकता आज का इंसान. हार्दिक बधाई आपको

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 22, 2014 at 9:41am

आपको इस रचना के भाव भा गए , आपका बहुत बहुत आभार.आ० मीना जी /आ० डॉ. विजय शंकरजी/आ० जवाहरजी.
आपकी सराहना प्रेरणादायी है.

Comment by Meena Pathak on June 21, 2014 at 10:18pm

सच कहा आप ने .. बहुत सुन्दर .. बधाई | सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 21, 2014 at 8:29pm
बहुत सही , बहुत सुन्दर कहा आपने आ o विजय प्रकाश जी , नीयत शुद्ध हो तो और क्या चाहिए।
बधाई।
सादर.
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 21, 2014 at 1:33pm

बिलकुल सही कहा आपने! बिना अंत:करण की शुद्धि के पूर्ण समर्पण नहीं हो सकता 

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