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प्यार , तुझे एक नया नाम देते हैं ---डा० विजय शंकर

प्यार चलो, तुझे एक नया नाम देते हैं ,
नव रूप ,नव रंग , नई पहचान देते हैं.
तेरे मतलब से मतलब निकाल देते हैं ,
बेमतलब प्यार का मतलब बता देते हैं.
तुझे तेरे स्व- अर्थ से मुक्त कर देते हैं ,
अपनत्व में लीन निस्वार्थ रूप देते हैं .
ये तेरे बदरंग , रंग निकाल देते हैं ,
पारदर्शी प्रिज्म सा रूप तुझे देते हैं .
तकने वालों को तू कांच नज़र आएगा ,
पास जिसके हो उसे ,सब रंग दिखायेगा .


मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 814

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Comment by Dr. Vijai Shanker on June 27, 2014 at 8:48am
बहुत बहुत बहुत धन्यवाद , आदरणीय विजय प्रकाश शर्मा जी , आपको यह पंक्तियाँ अच्छी लगी , बहुत अच्छा लगा ।
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on June 27, 2014 at 8:42am

आपको इस रचना पर भूरि-भुरि प्रशंसा का इनाम स्वीकारें आ० विजय जी.

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 26, 2014 at 11:31pm
आपको रचना पसंद आई , बहुत बहुत धन्यवाद आo कुंती मुकर्जी जी .
Comment by coontee mukerji on June 26, 2014 at 10:10pm

नयी सोच के साथ एक सुंदर रचना....आपको हार्दिक बधाई.

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 26, 2014 at 7:20pm
आ o रवि प्रभाकर जी , रचना पसंद आयी आपको , बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 26, 2014 at 7:16pm
आ o डॉ o गोपाल नारायण जी , रचना के अनुमोदन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by Ravi Prabhakar on June 26, 2014 at 4:38pm

तेरे मतलब से मतलब निकाल देते हैं ,
बेमतलब प्यार का मतलब बता देते हैं.

बहुत खूब आदरणीय विजय शंकर जी. बधाई स्‍वीकार करें.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 26, 2014 at 12:43pm

क्या बात है ?

आपने प्यार को इन्द्रधनुषी कर डाला i  हर कोई अपनी पसंद का रंग देखे i  बहुत-बहुत बधाई i

कृपया ध्यान दे...

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