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जमीर कीमती है ,रखते हैं - डा० विजय शंकर

हवा में दम है , उड़ा के ले जाये हमको ,
जम गए हम तो खुद ना हीं हटा करते हैं |

हुकूमत है , हुक्मरान बदलते रहते हैं ,
साथ में हम भी बदलें , यह नहीं करते हैं |

मंहगाई है ,दिन ब दिन बढ़ती रहती है ,
भाव बढ़ा लें अपना ,न , हम नहीं करते हैं |

कमोडिटी नहीं हैं , गायब हैं बाजार से ,
ज़िंदा हैं , खिदमत है दुनियां की, करतें हैं |

जमीर कीमती है , औकात है ,रखते हैं ,
सौदागर हैं , यह तिज़ारत नहीं करते हैं |

मौलिक एवं अप्रकाशित.
डा० विजय शंकर

Views: 687

Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on July 11, 2014 at 1:26pm
आदरणीय सौरभ पांडे जी , रचना आपको पसंद आई , धन्यवाद . सुझाव का ध्यान रखूंगा .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 11, 2014 at 12:15am

आदरणीय विजय शंकरजी,

आपकी इस रचना के लिए बधाई. कहन या कथ्य बहुत ही उम्दा है. आदरणीय भाई अरुन अनन्त के कहे पर विचार करना उचित होगा.

सादर

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 7, 2014 at 10:01pm
आदरणीय गिरिराज जी ,
रचना की बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद . चार दशकों की सरकारी सेवा के बाद जो कुछ लिखता हूँ उसका मकसद अपने अनुभवों और भावों को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास है और उसके लिए सरल और सहज , समझ में आने वाली भाषा का प्रयोग करता हूँ. अब वह साहित्य की कौन सी विधा है इस पर ध्यान काम ही देता हूँ . वैसे विश्वास है आपका सानिध्य रहा तो वह भी सीख ही जाऊंगा . सादर .

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 7, 2014 at 7:36pm

आदरणीय विजय भाई , सुन्दर रचना के लिये बधाइयाँ ॥ आदरणीय पर आपने ग़ज़ल कही है तो ये रचना गज़ल नही हो पाई है , बह्र मे कुछ कमियाँ हैं ॥सादर ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 6, 2014 at 10:03pm
बहुत बहुत धन्यवाव आ o अरुण शर्मा ' अनंत ' जी , सुझाव अच्छा है , मूड बन गया तो वो भी हो जायेगा।
Comment by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2014 at 5:11pm

आदरणीय विजय जी सुन्दर रचना इसे ग़ज़ल का रूप दीजिये इस रचना पर बधाई स्वीकारें.

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 6, 2014 at 12:32pm
आदरणीय गोपाल नरायन जी , सादर बहुत बहुत धन्यवाद।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 6, 2014 at 11:59am

विजय शंकर जी

क्या ग़ज़ल कही है i बहूत खूब -जमीर कीमती है , औकात है ,रखते हैं ,
                                          सौदागर हैं , यह तिज़ारत नहीं करते हैं

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 6, 2014 at 11:55am
प्रिय जितेन्द्र जी , बहुत बहुत धन्यवाद .
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 6, 2014 at 11:10am

जमीर कीमती है , औकात है ,रखते हैं ,
सौदागर हैं , यह तिज़ारत नहीं करते हैं........वाह! बहुत खूब, क्या बात कही है आपने. हार्दिक बधाई आदरणीय डा.विजय जी

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