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कर्मठ

जैसे ही पता चलता है कि नेताजी स्कूल प्रांगण में आ चुके हैं |कर्मवीर जी सक्रिय हो जाते हैं और दिनेश से माईक लेकर स्वागत कि घोषणा करते हैं |फिर कार्यक्रम के समापन तक सभी जगह सभी के साथ कर्मठ कर्मवीर जी कैमरे में कैद हो जाते हैं |मंच से कुछ दूर कुर्सी पर बैठा दिनेश अपनी निष्क्रियता पर गहरी सांस लेता है और कर्मठ कैमरे और कर्मठ कर्मवीर जी के चेहरे पर बार-बार आ रहे फ़्लैश को देखता रहता है |

 C-@-सोमेश कुमार

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment by Shubhranshu Pandey on October 28, 2014 at 11:49am

सुन्दर कथा.

सादर.

Comment by ram shiromani pathak on October 13, 2014 at 9:09pm
ज़ोरदार व्यंग। बधाई आदरणीय
Comment by विनय कुमार on October 13, 2014 at 8:22pm

बहुत सुन्दर , आजकल लोग करते कम हैं और दिखावा ज्यादा करते हैं |

Comment by somesh kumar on October 13, 2014 at 7:06am

उत्साह-वर्धन एवं स्नेह के लिए सभी साहित्य-प्रेमी मित्रों को शुक्रिया |

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 12, 2014 at 11:40pm

एक सच का सुंदर चित्रण. कुछ लोग होते है ऐसे जो स्वयं ऊपर आने के लिए दूसरों को गिरा देते है. बहुत-बहुत बधाई आपको आदरणीय सोमेश जी

Comment by Dr. Vijai Shanker on October 12, 2014 at 7:21pm

ऐसे ही कर्मठों ने तो सत्यानाश कर रखा है जो सिर्फ दिखावे के लिए काम कर के फोटो खिचवाते रहते हैं।  सही चित्र प्रस्तुत करती  है यह लघु कथा आदरणीय सोमेश कुमार जी बधाई।  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 6:53pm

बहुत बड़ी सच्चाई लिखी है ऐसे महत्वाकांक्षी लोग जो दूसरों को पीछे धकेल लाइम लाईट में आने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं हर जगह मिल जायेंगे कितना शातिर दिमाग होता है उनका और सच्चे सीधे लोग बस देखते रह जाते हैं ,बहुत अच्छी लगी लघु कथा हार्दिक बधाई |

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