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ये दिये क्या भाव हैं अम्मा ?" गाडी में बैठी सभ्रांत महिला ने दीपक बेचने वाली बुढ़िया से पूछा I  
"50 रुपये के 100 हैं बिटिया I" बुढ़िया ने उत्तर दिया I
"हे भगवान् ! इतने महेंगे ? अम्मा तुम तो लूट रही हो I"
"एक बात का जवाब दो बेटी, ये महंगाई क्या सिर्फ अमीरों के लिए ही है, हम गरीबों के लिए नहीं ?"

मौलिक एवं अप्रकाशित

आलोक मित्तल

मथुरा

Views: 562

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Comment by विनय कुमार on October 26, 2014 at 1:16am

बहुत सुन्दर लघुकथा , बधाई..

Comment by Alok Mittal on October 24, 2014 at 2:51pm

आदरणीय Vandana जी.....आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by vandana on October 24, 2014 at 1:54pm

बहुत सुन्दर सन्देश आदरणीय बेहतरीन 

Comment by Alok Mittal on October 24, 2014 at 1:00pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी...आपका दिल से आभार ..मेरा हौसला बढाने के लिए ..

Comment by Alok Mittal on October 24, 2014 at 12:58pm

आदरणीय rajesh kumari जी ....मेरा हौसला बढाने के लिए आपका हृदय ताल से बहुत आभार ...

Comment by Alok Mittal on October 24, 2014 at 12:56pm

आदरणीय somesh kumar जी .....आपके स्नेह का आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 22, 2014 at 11:45pm

बहुत अच्छी लघुकथा, आदरणीय आलोक जी. फ़ालतू के खर्च और जबरन के दिखावों में पैसा खपाना तो कोई महगाई नही. किसी के खून पसीने की कमाई में महगाई. बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 22, 2014 at 10:10pm

सही कहा ,क्या मंहगाई सिर्फ अमीरों के लिए ही है ,सच में ये देखकर सुनकर शर्म आती है उन लोगों पर जो मॉल में तो सेंकडों रूपये बिना किसी मोल भाव  के लुटा देते हैं और गरीबों से दीयों तक में मोलभाव करते हैं |बहुत खूब कटाक्ष किया है आपकी लघु कथा ने ऐसे वर्ग पर |

हार्दिक बधाई आपको |

Comment by somesh kumar on October 22, 2014 at 10:09pm

shi mrm hai ,acchi khani

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