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आजकल हँसता हंसाता कौन है

२१२२...२१२२...२१२.

फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन ..

=====================

आजकल हँसता हंसाता कौन है

गम छुपा के मुस्कराता कौन है !!

हम ज़माने पे यकीं कैसे करें,

आज कल सच-सच बताता कौन है.!!

उलझनों में भी हैं कुछ नादानियाँ,

याद बचपन की भुलाता कौन है !!

जब मिलूँगा तो शिकायत भी करू

इसलिए मुझको बुलाता कौन है!!

दो घडी की बात है ये ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी भर को निभाता कौन है.!!

हार है या जीत है इस खेल में,

छोड़ कर मैदान जाता कौन है !!

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

** आलोक **

मथुरा

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Comment

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Comment by maharshi tripathi on November 25, 2014 at 5:07pm

बेहद शानदार गजल ,आ.अलोक जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 25, 2014 at 4:50pm

सुंदर i असरदार i

Comment by Meena Pathak on November 25, 2014 at 4:02pm

हम ज़माने पे यकीं कैसे करें,

आज कल सच-सच बताता कौन है.!!..........बहुत सुन्दर ..बधाई स्वीकारें आदरणीय 

Comment by Ketan Kamaal on November 25, 2014 at 12:14pm

आजकल हँसता हंसाता कौन है

गम छुपा के मुस्कराता कौन है !!

Waaaah khoob Matla Huaa hai 

हम ज़माने पे यकीं कैसे करें,

आज कल सच-सच बताता कौन है.!!

Aaj Kal Sach Ko Batata Kaun hai. Aesa kuch kiya jaa sakta hai 

उलझनों में भी हैं कुछ नादानियाँ,

याद बचपन की भुलाता कौन है !!

Waaaaaaaaaaaah

जब मिलूँगा तो शिकायत भी करू

इसलिए मुझको बुलाता कौन है!!

ise aur polish kariye bahut achcha sher hoga 

दो घडी की बात है ये ज़िन्दगी,

ज़िन्दगी भर को निभाता कौन है.!! Is Misare Men Ko Bharti ka lag raha hai Jisase Lay atak rahi hai uski jagah Aik Suggestion Hai Dekhiye
DO GHADI SAB SATH CHALTE HAI YAHA'N
ZINDAGI MEN SATH JATA KAUN HAI 

हार है या जीत है इस खेल में,

छोड़ कर मैदान जाता कौन है !!

IS SHER MEN CLEAR NAHIN AAP KAUN SE KHEL KI BAAT KAR RAHE HAI 

JEET BHI MILTI RAHI AU'R HAAR BHI. AAP PAHLA MISARA YUN KAHE TO ZYADA MAANI NIKALTE HAI 

YE MERE NIJI SUJHAAV HAI INHE MANNA YA NA MANNA AAPKE UPAR HAI SAHAB 

BAHUT ACHCHI GHAZAL KAHI HAI MUBARAK BAAD AAPKO AUR KAHTE RAHIYE QAMIYABI MILEGI ZAROOR 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 25, 2014 at 11:10am

हम ज़माने पे यकीं कैसे करें,

आज कल सच-सच बताता कौन है.!!--वाह्ह्ह्ह 

बहुत सुन्दर ग़ज़ल ...हार्दिक बधाई आपको आलोक जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2014 at 11:07am

उलझनों में भी हैं कुछ नादानियाँ,

याद बचपन की भुलाता कौन है !!

बहुत खूब , हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय आलोक जी l

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 25, 2014 at 9:20am
अच्छी रचना है , जब तक जिंदगी है , जिंदगी छोड़ कर जाता कौन है।
बधाई आदरणीय आलोक जी।

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