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विभु से मांगो मित्र तुम, अब ऐसा वरदान

नये  वर्ष में शांत हो, मानव का शैतान

 

हो न धरा अब लाल फिर, महके मनस प्रसून

किसी अबोध अजान का, नाहक बहे न खून

 

सबके जीवन में खुशी, छा जाए भरपूर

अच्छे  दिन ज्यादा नहीं, भारत से अब दूर

 

कवि गाओ वह गीत अब, जिससे सदा विकास

तन में हो उत्साह प्रिय, मन में हो उल्लास

 

आपस में सद्भाव हो, सभी बने मन-मीत

ओज भरे स्वर में कवे, महकाओ कुछ गीत 

 

ऐसा जिससे नग हिले, विचले पारावार 

भरे देश हुंकार जब, बरसे धाराधार

 

पावन हो सबका ह्रदय, सुरभित हो संसार   

स्वाति बूँद से हो प्रकट, गजमुक्ता, घनसार

 

स्वागत है नव्-वर्ष का, जिसमे नव उत्कर्ष

विकसित सबका हिय-कमल  जगमग भारतवर्ष

 

भारत में ही भारती,  सबको बांटे ज्ञान

नए वर्ष में हो नया, उनका भी अभियान

 मौलिक/अप्रकाशित

 

                

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 25, 2014 at 10:57pm

सादर आभार आदरणीय

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 2:23pm

वंदनाजी

आभार i सादर i

Comment by vandana on December 25, 2014 at 1:52pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय गजमुक्ता और घनसार के बारे में बताने के लिए सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 12:13pm

विजय सर !

आपका  स्नेह मेरा संबल i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 12:12pm

आ० सौरभ जी

प्रणाम  द्रोण  !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 12:11pm

वंदना जी

आपका आभार  i स्वाति  बूँद का बड़ा महत्त्व है  i सीप में यह मोती बनती है i चातक  की प्यास यही बुझाता है i हाथी के मद भरे सिर पर गिरता है तो गज-मुक्ता बनता है i केले के पत्ते पर गिरता है तो कपूर (घनसार ) बनता है  और भी  कई विशेषताएं हैं i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 25, 2014 at 12:05pm

जवाहर लाल जी

आभार प्रकट करताहूं i

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 25, 2014 at 11:27am
बहुत सुन्दर कृति ! आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , बधाई, सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 25, 2014 at 11:13am

// यदि संबोधन चिन्ह लगा देता तो आपको जरा भी समय न लगता //

संभवतः, आदरणीय गोपाल नारायनजी..

Comment by vandana on December 25, 2014 at 5:17am

एक से बढ़कर एक संग्रहणीय दोहे आदरणीय गोपाल सर 

सर एक सविनय निवेदन है कि कृपया मेरी जिज्ञासा का निदान कीजियेगा 
"स्वाति बूँद से हो प्रकट, गजमुक्ता, घनसार " के पीछे क्या तथ्य हैं यह बताइयेगा क्योंकि मुझे तो सिर्फ स्वाति से मोती बनने की बात ही पता है 

कृपया ध्यान दे...

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