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स्पर्श

कभी-कभी तुम्हारे स्पर्श मात्र से

जो सिहरन होती है वो उस

चरम से बड़ी है जो शायद

तुम्हें पूर्ण पाने से मिले |

बीच सागर में ,तपती दोपहरी में

अकेले बेड़े पर भटकते नाविक के लिए

जैसे जीवनदायक है जलद की कुछ बूंदे

वैसे ही अनमोल हैं क्षण-क्षण

जो तुम्हारे साथ बीताता हूँ |

मोल चीजों के होने से नहीं होता अपितु

मोल बढ़ता है ज़रूरत होने से

और ये सच है कि मेरा जीवन

अभी झुलसते मरुस्थल सा है

जहाँ सैकड़ो मृग –मरीचिकाएँ उभरती हैं

और मेरी प्यास हाँफ-हाँफ कर भटकती है

ऐसे में तुम्हारा सामीप्य मरुधान है

अल्प समय का ही सही

तुमसे मेरी समस्या का निदान है

|सोमेश कुमार (२१/०८/०९)

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Comment

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Comment by somesh kumar on December 28, 2014 at 10:59pm

मिथिलेश भाई जी एवं श्याम नारायन भाई जी हौसलाअफजाई के लिए शुक्रिया |शिज्ज शक्र भाई जी आपको रचना पसंद आई तो लिखना सार्थक हुआ| सौरभ सर का आशीष मिलना और मार्गदर्शन हमेशा अच्छे रचनाकर्म के लिए प्रेरित करता है |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 28, 2014 at 3:06pm

अच्छा प्रयास हुआ है. तथ्य विन्यास पर और ध्यान दें.
शुभकामनाएँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 27, 2014 at 6:01pm

बहुत बढ़िय़ा आदरणीय सोमेश जी बहुत अच्छी पंक्तियाँ हैं, सादर बधाई इस रचना के लिये

Comment by Shyam Narain Verma on December 27, 2014 at 2:22pm

सुन्दर प्रस्तुति हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 26, 2014 at 8:55pm

सुन्दर भावाभिव्यक्ति आदरणीय सोमेश भाई ... बहुत बहुत बधाई ....

क्या पंक्तिया है .... वाह्ह्ह 

और मेरी प्यास हाँफ-हाँफ कर भटकती है

ऐसे में तुम्हारा सामीप्य मरुधान है

अल्प समय का ही सही

तुमसे मेरी समस्या का निदान है

Comment by somesh kumar on December 26, 2014 at 8:10pm

शुक्रिया ,पढ़ने वालों का भी और पढ़ कर अपनी अमूल्य टिप्पणी देने वाले मित्रों एवं आदरणीय अग्रजों का 

Comment by Hari Prakash Dubey on December 26, 2014 at 4:58pm

........ प्यास हाँफ-हाँफ कर भटकती है,सुन्दर रचना ,बढ़िया प्रयास ,हार्दिक बधाई सोमेश भाई !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 26, 2014 at 11:58am

सोमेश जी

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति दी आपने  i

Comment by Dr. Vijai Shanker on December 26, 2014 at 11:45am
स्पर्श करती है आपकी यह रचना , बहुत बहुत बधाई आदरणीय सोमेश जी, सादर।

कृपया ध्यान दे...

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