For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मजदूरों की बस्ती में दो कँपकँपाती हुई आवाज़ें

“सुना है घर वापसी के 5 लाख दे रहे हैं”

“हाँ भाई मैं भी सुना”

“हम तो घर में ही रहते हैं, कुछ हमें भी दे देते”

-मौलिक व अप्रकाशित

Views: 759

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 21, 2017 at 10:06pm

वाह बहुत सुंदर कथा , किस कदर बेबसी को दर्शाया है आपने वो भी इतने कम शब्दों में , बहुत खूब आदरणीय सिज्जू जी |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 18, 2015 at 9:58am

आदरणीय सौरभ सर रचना पर विस्तृत टिप्पणी से मन हर्ष से भर गया, उस पर आपका अनुमोदन हौसला बढ़ा गया। आपका तहेदिल से शुक्रिया।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 18, 2015 at 9:55am

आदरणीय विनय कुमार सिंह जी आपने रचना को समय दिया मैं आपका तहेदिल से आभारी हूँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 18, 2015 at 9:54am

आदरणीया महेश्वरी जी रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2015 at 7:22pm

अय हय ! अय हय ! क्या करारा, क्या सटीक !

वार्तालाप में एक के स्वर की बेबसी जिस मासूमियत से उभर कर आयी है कि मुँह से बरबस ’वाह’ निकल रहा है, शिज्जू भाईजी.  एक अनायास ही व्यापक हो गयी गयी या सायास व्यापक की गयी प्रक्रिया कितनी गहराई तक समाज को आंदोलित करती है, यह आपकी लघुकथा से ज़ाहिर है.

फ़ैज़ ने सही ही कहा है न - और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा ..
इस सशक्त लघुकथा पर दिल से बधाइयाँ

Comment by विनय कुमार on January 14, 2015 at 3:09pm

बहुत बेहतरीन लघुकथा , हार्दिक बधाई आपको ..

Comment by Maheshwari Kaneri on January 7, 2015 at 6:25pm

सुंदर लघुकथाआपको हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 1, 2015 at 8:31am

आदरणीय सोमेश जी आपका हार्दिक आभार। प्रवासियों के घर लौटने पर 5 लाख कौन देगा आप ही बतायें। आजकल किसको पड़ी ये जानने की कि देश में कौन है और विदेश में कौन। सबका अपना स्वार्थ हैं थोड़ा सा ज़ोर दिमाग को दें तो आप समझ जायेंगे।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 1, 2015 at 8:27am

आदरणीय हरिप्रसाद दूबे जी आपका हार्दिक आभार

Comment by somesh kumar on December 30, 2014 at 10:23am

सुंदर लघुकथा है पर इसका सांकेतिक भाव समझ नहीं आया ,यहाँ घर वापसी धर्मांतरण के संद र्भ में है अथवा प्रवासियों के लौटने हेतु 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
15 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service