For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

महबूब ख़ुदा मेरा ,उल्फ़त ही इबादत है

 २२१ १२२२ २२१ १२२२

महबूब ख़ुदा मेरा ,उल्फ़त ही इबादत है 

है दीन बड़ा मुश्किल ,आसान मुहब्बत है 

तेजाब छिड़कते हो कलियों के तबस्सुम पर 

कहते हो इसे मज़हब ,क्या ख़ूब इबारत है 

ये खून खराबा क्यूं ,ये शोर शराबा क्यूं 

मैं किसको झुकाऊँ सिर ,इसमें भी सियासत है 

इक सब्ज़ पैराहन पर , है खून के कुछ छीटें

दहशत में लड़कपन है ,नफ़रत की वज़ाहत है              वज़ाहत=विस्तार \पराकाष्टा 

बारूद की बदबू है ,बच्चों के खिलौनों में

मुँहजोर हुकूमत है ,पुरजोर मुजम्मत है                      मुजम्मत= निंदा 

क्यूं कोई बने हिन्दू ,क्यूं कोई बने मुस्लिम

क्या दीन तराजू है ,क्या धर्म तिजारत है

नापाक इरादों पर क्यूं शर्म नहीं आती

पूछो  तो ख़ुदा से ,क्या क़त्ल शराफ़त है

बन्दूक उठाते हो ,मासूम परिंदों पर

तितली के परों पर बम , क्या ख़ूब हिमाकत है

'खुरशीद'  के चेहरे पर ,कालिख न उछालो तुम

वो रात कहानी थी , ये सुबह हकीक़त है

मौलिक व अप्रकाशित  

Views: 584

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Hari Prakash Dubey on December 29, 2014 at 11:15pm

नापाक इरादों पर क्यूं शर्म नहीं आती

पूंछो तो ख़ुदा से ,क्या क़त्ल शराफ़त है........सुन्दर रचना  आदरणीय खुरशीद जी , बधाई आपको !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 29, 2014 at 10:48pm

आदरणीय खुरशाद जी बहुत खूबसूरत मुरस्सा ग़जल हुई है बहुत बहुत बधाई पूरी ग़ज़ल के लिये।
इक सब्ज़ पैराहन पर , है खून के कुछ छीटें बस इस मिसरे की तक्ती समझ में नहीं आ रही है।

Comment by Anurag Prateek on December 29, 2014 at 10:15pm

तेजाब छिड़कते हो कलियों के तबस्सुम पर 

कहते हो इसे मज़हब ,क्या ख़ूब इबारत है -- kya kahne wah

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 29, 2014 at 7:28pm

खुर्शीद जी 

बहुत  उम्दा  i  एक से बढ़कर एक शेर i बधाई हो i

Comment by Dr Ashutosh Mishra on December 29, 2014 at 5:07pm

तेजाब छिड़कते हो कलियों के तबस्सुम पर 

कहते हो इसे मज़हब ,क्या ख़ूब इबारत है ..समाज के वर्तमान परिदृश्य पे लिखे गए सभी अशार बहुत दिल भावन हैं चिंतन के लिए बिबश करते हैं ..झकझोरने वाले इन शेरो के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by khursheed khairadi on December 29, 2014 at 3:09pm

आदरणीय गिरिराज साहब ,मिथिलेश जी ,राहुल डांगी साहब आप सभी का हृदयतल से आभार 

१.सातवें शेर का मिसरा-ए-सानी कुछ यूं है -'पूछो तो ख़ुदा से तुम ,क्या क़त्ल शराफ़त है '  राहुल भाई जी ,माफ़ी चाहता हूं 'पूछो' का पूंछो वैसे ही हो गया जैसे आपकी टिप्पणी में 'नहीं' का 'नबीं'  तथा 'तुरंत ' का तुरनित हुआ है |ये अच्छा है कि हम पढ़ने के साथ साथ मुद्रण-त्रुटि का प्रूफ सुधार भी करते जायें |अक्सर देखा है कि मुद्रण-त्रुटि टाइपिंग करने वाले की पकड़ में नहीं आती है |सादर 

२.आदरणीय गिरिराज साहब ,मिथिलेश जी मिसरे में १२२२ की संगत  में 'ख़ुदा से तुम ' है |त्रुटि पर ध्यान दिलाने के लिए आभार

आप सभी इसी तरह स्नेह बनाये रखियेगा |  सादर 

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 29, 2014 at 12:06pm
बहुत सुन्दर गजल आदरणीय भाव विभोर हो गया हुँ पढकर! आपके प्रष्ट पें इक सवाल है आदरणीय!
पूंछो व पूछो की मात्रा अलग है इनमे अन्तर समझाने का कष्ट करें! माफी चाहता हुँ पर मुझसे पूछे बिना रहा नबीं जाता तुरनित समझा हुआ याद रहता है! सादर!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 29, 2014 at 11:29am

समाज की हालिया स्थिति पर सभी अशआर बहुत खूब हुये  हैं , आपको दिली बधाइयाँ ।

बारूद की बदबू है ,बच्चों के खिलौनों में

मुँहजोर हुकूमत है ,पुरजोर मुजम्मत है  

बन्दूक उठाते हो ,मासूम परिंदों पर

तितली के परों पर बम , क्या ख़ूब हिमाकत है   -- लाजवाब !! खूब बधाइय़ाँ , आदरणीय खुर्शीद  भाई । 

पूंछो तो ख़ुदा से ,क्या क़त्ल शराफ़त है    ---  ये मिसरा बेबह्र हो गया है ,  पूंछो को पूछो कर लीजियेगा ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 29, 2014 at 11:26am
इस उम्दा ग़ज़ल के लिए आपको हार्दिक बधाई।
पूछो तो ख़ुदा से क्या क़त्ल शराफत है- इस मिसरे को देख लीजियेगा।
Comment by Shyam Narain Verma on December 29, 2014 at 10:19am

" सुन्दर भावों से सजी इस गज़ल के लिए आपको बहुत बधाई ...... "

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Monday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service