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नसरी नज़्म :- "शाईरी"

शाईरी
सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं
इसके अनेक रूप हैं
कहीं साया कहीं धूप है
शाईरी
सुक़रात ने की,मीरा ने की
मज़दूर ने की,धनवान ने की
इसमें क़ाफ़िया लाज़िम नहीं
इसमे बह्र भी लाज़िम नहीं
आप जो ख़ूबसूरत बाते करते हैं
वो शाईरी है
शाईरी नज़ाकत का नाम है
इससे सबको काम है
शाईरी के लिये लाज़िम है अहसास
दर्द भरा दिल,जैसे बिस्मिल
सब शाईर के हैं
शाईर सबका होता है
जैसे भगवान सब का होता है
शाईरी सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं
शाईरी
क़सीदा है,मर्सिया है
अतुकान्त कविता है
मुक्तक है,आज़ाद नज़्म है
नसरी नज़्म है
गीत है,संगीत है
दोहा है,रुबाई है
छंद है,तज़्मीन है
शाईरी को समझो
शाईर को समझो
उसके अहसास को समझो
वो सबका दर्द बयान करता है
वो अपनी शाईरी से
सबका मन मोह लेता है
शाईरी शब्दों का जाल है
जिसके पास ज़्यादा शब्द वह मालामाल है
शाईरी सिर्फ़ ग़ज़ल का नाम नहीं |

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 18, 2015 at 4:35pm

आ० समीर कबीर् साहेब

शायर और शायरी को  बहुत  अच्छे  से शब्द आपने दिए . आपकी धन्यवाद, मुबारकवाद .

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 18, 2015 at 10:14am
वाह ! आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , बहुत ही सरल और सुन्दर तरीके से शायरी का मायने समझा दिया आपने , बहुत ही सारगर्भित जानकारी दी है आपने।
आपका आभार और धन्यवाद, सादर।

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