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कुछ बनना होगा ........'इंतज़ार'

तुम दीया हो तो मुझे बाती बनना होगा
तेरा साथ पाने को चाहे मुझे जलना होगा !

तुम अगर रात हो तो मुझे अँधेरा बनना होगा
तुम से मिलने को मुझे सवेरों से लड़ना होगा !

तुम ग़र दरिया हो तो मुझे समन्दर बनना होगा
तुमको फिर मुहब्बत में मुझ से मिलना होगा !

तुम अगर हवा हो तो मुझे धूल बनना होगा
मुझे आगोश में ले आँधियों में तुम्हें उड़ना होगा !

तुम अगर चाँद हो तो मुझे चकोरी बनना होगा
तुमको हर रात मेरा मिलन का गीत सुनना होगा !

फूल ग़र तुम हो तो मुझे भंवरा बनना होगा
बोसों के लिये फिर 'इंतज़ार' को ना डरना होगा !

*********************************************

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by मिथिलेश वामनकर on April 21, 2015 at 10:48pm
आदरणीय मोहन सेठी जी सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।
Comment by MUKESH SRIVASTAVA on April 21, 2015 at 12:34pm

 

 अच्छी रचना के लिए बधाई

Comment by Samar kabeer on April 21, 2015 at 11:18am
जनाब मोहन सेठी 'इंतज़ार' जी,आदाब,सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें |
Comment by Tanuja Upreti on April 21, 2015 at 10:13am

बहुत सुन्दर रचना

 

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 21, 2015 at 3:42am
तुम अगर हवा हो तो मुझे धूल बनना होगा
मुझे आगोश में ले आँधियों में तुम्हें उड़ना होगा !
वाह, आदरणीय मोहन सेठी जी , बधाई , सादर।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 20, 2015 at 9:02pm

तुम अगर रात हो तो मुझे अँधेरा बनना होगा
तुम से मिलने को मुझे सवेरों से लड़ना होगा !

क्या बात है आदरणीय रचना में ताजगी बहुत पसंद आई!बधाईयां!

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