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सिर्फ देखा है जी भर के …

सिर्फ देखा है जी भर के …

सिर्फ देखा है जी भर के  हमने तुम्हें
इस ख़ता पे  न  इतनी सज़ा दीजिये
ज़िंदगी भर हम ग़ुलामी करेंगे मगर
रुख़ से चिलमन ज़रा ये हटा दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर  के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न  इतनी  सज़ा दीजिये

हम फ़कीरों  का  दर कोई होता नहीं
हर दर  पे  फ़कीर  कभी  सोता नहीं
अब  खुदा  आपको  हम बना बैठे हैं
अब पनाह दीजिये या मिटा दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये

आप के  प्यार में इस कदर खो गए
जाने  बाहों  में कब आपकी सो गए
होश  हो  न हमें अब सुबह शाम का
अपनी नज़रों से ऐसी पिला दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये


नींदों में ख़्वाब थे  ख़्वाब  में  आप थे
हम कहाँ दूर थे  बस  आपके  पास थे
आप ही से  क्यूँ  दूरी न  मिटाई गयी
इस दिल को बस इतना  बता दीजिये

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on July 12, 2015 at 9:24pm

आदरणीय shree suneel जी प्रस्तुति पर आपकी  प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by shree suneel on July 12, 2015 at 10:08am
इस ख़ूबसूरत गीत-रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय सुशील सरना सर जी.
Comment by Sushil Sarna on July 10, 2015 at 3:44pm

आदरणीय डॉ गोपाल नरायन श्रीवास्तव  जी प्रस्तुति पर आपकी उत्सावर्धक प्रशंसा का हार्दिक आभार। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 10, 2015 at 9:36am

आदरणीय  प्रेम गीत के तो आप धनी हैं i क्या बेहतरीन लिखा है . सुन्दर .

Comment by Sushil Sarna on July 9, 2015 at 1:08pm

आदरणीय  Rahul Dangi   जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 9, 2015 at 12:58pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on July 9, 2015 at 12:57pm

आदरणीय vijay nikore  जी रचना पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 8, 2015 at 11:17pm
आदरणीय बहुत सुन्दर रचना। बधाई स्वीकार करें । आदरणीय से निवेदन है क्रपया विधा का नाम व धन्द विधान जरूर लिखे जिससे हम विधा के बारे में अच्छी तरह सीख सकें।

नींदों में ख़्वाब थे ख़्वाब में आप थे
हम कहाँ दूर थे बस आपके पास थे
आप के साथ पास का तुकान्त सही है ?
Comment by narendrasinh chauhan on July 8, 2015 at 6:39pm

सिर्फ देखा है जी भर के हमने तुम्हें
इस ख़ता पे न इतनी  सज़ा दीजिये

सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई

Comment by vijay nikore on July 8, 2015 at 6:16pm

सुन्दर भाव पिरोय हैं। बधाई।

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