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आधुनिक भारत के भगवान चले गए।
इस देश के असली स्वाभिमान चले गए।।

धर्म को अकेला छोड़ विज्ञान चले गए।
एक साथ गीता और कुरान चले गए।।

मानवता के एकल प्रतिष्ठान चले गए।
धर्मनिरपेक्षता के मूल संविधान चले गए।।

इस सदी के श्रेष्ठ ऋषि महान चले गए।
कलयुग के इकलौते इंसान चले गए।।

ज्ञान राशि के अमित निधान चले गए।।
सबके प्यारे अब्दुल कलाम चले गए।।

=============================
मौलिक अप्रकाशित

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Comment by kanta roy on July 29, 2015 at 5:47pm
अश्रुपूरित नयन से श्रद्धांजली हमारे गौरव को..
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 29, 2015 at 2:35pm
धन्यवाद रवि शुक्ल जी
Comment by Ravi Shukla on July 29, 2015 at 1:23pm

देश के अभूतपूर्व राष्‍ट्रपति ए पी जे कलाम साहब को विनम्र श्रद्धाजंलि

  रचना के माध्‍यम से आपकी श्रद्धाजंलि के लिये भी आभार आदरणीय पंकज जी

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 28, 2015 at 10:29pm
समर कबीर साब; हर्ष महाजन सर; मिथिलेः सर; डॉ विजय शंकर सर; नीता कसर जी एवं राजेश कुमारी जी आप सभी को आभार।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 28, 2015 at 9:46pm

भारत के उस महान  व्यक्ति की श्रद्धांजलि हेतु अच्छी रचना लिखी है हमारी भी विनम्र श्रद्धांजलि.

Comment by Nita Kasar on July 28, 2015 at 9:02pm
विराट व्यक्तित्व के स्वामी कलाम साहब देश और युवाओं ।के लिये अंतिम समय तक पूरे तन मन से लगे रहे है मेरी विनम्र
श्रदधाजंलि उनके लिये ।परमात्मा उनकी आत्मा को शांति दें ।
Comment by Dr. Vijai Shanker on July 28, 2015 at 8:40pm
श्रंद्धांजलि

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 28, 2015 at 12:56pm

भारत के उस महान व्यक्तित्व को भावभीनी श्रद्धांजली .....

Comment by मनोज अहसास on July 28, 2015 at 12:52pm
नमन
सादर
Comment by Harash Mahajan on July 28, 2015 at 11:29am

श्रद्धांजलि स्वरूप बहुत ही  सुंदर शब्दों का प्रयोग किया है आपने Pankaj Kumar Mishra जी |ऐसे महान शक्सियत को हम नमन करते हैं और दुआ करते हैं की  खुदा उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे | आमीन !!

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