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खुद को प्रांजल कैसे लिख दूँ

खुद को शुद्ध नहीं कर पाया, तुझ को कश्मल कैसे लिख दूँ।
मन पर पाप का बादल छाया, खुद को निर्मल कैसे लिख दूँ।।

प्रतिपल भजन लोभ के गाऊँ, हर पल स्वार्थ साधना चाहूँ।
लोभ का दमन नहीं कर पाया, खुद को निश्छल कैसे लिख दूँ।।

भ्रम की पर्त चढ़ी है नैन, कटती नहीं कठिन ये रैन।
तिमिर को दूर नहीं कर पाया, आत्मा उज्जवल कैसे लिख दूँ।।

चलता जाता मैं प्रतिदिन, पकड़नें अपना ही प्रतिबिम्ब।
अब तक प्राप्त नहीं कर पाया, खुद को निश्चल कैसे लिख दूँ।।

कण्ठ तक आ पहुँची है प्यास, हृदय में मात्र भरी है आग।
अभीप्सा शांत नहीं कर पाया, आँख में है जल कैसे लिख दूँ।।

अभी तक मिला नहीं तुझसे, शिकायत है मेरी खुदसे।।
वासना दूर नहीं कर पाया, खुद को प्रांजल कैसे लिख दूँ।।

मौलिक अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 31, 2015 at 7:48pm
सादर आभार आदरणीय शशि भँसल जी
Comment by shashi bansal goyal on August 31, 2015 at 7:02pm
बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 31, 2015 at 6:41pm

आदरणीय सुभश सर सादर अभिवादन; अभी सीखने की कोशिश में हूँ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 31, 2015 at 6:36pm

प्रयासरत रहें, भाईजी. शुभकामनाएँ. 

आपकी रचनाओं की प्रतीक्षा रहेगी. विश्वास है, आपको पता होगा कोई सार्थक रचनाकर्म किन-किन विन्दुओं से संतुष्ट होता है.

शुभ-शुभ

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 29, 2015 at 11:44pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय समर कबीर सर

Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:39pm
जनाब पंकज कुमार मिश्रा जी,आदाब,सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on August 28, 2015 at 10:29pm
आदरणीय काँटा राय मैम मिथिलेश सर और नरेंद्र सिंह चौहान सर आप सभी को सादर प्रणाम।
ऊर्जान्वित करने के लिए बहुत बहुत आभार।
Comment by kanta roy on August 28, 2015 at 10:20pm

खुद को शुद्ध नहीं कर पाया, तुझ को कश्मल कैसे लिख दूँ।
मन पर पाप का बादल छाया, खुद को निर्मल कैसे लिख दूँ।।

..........वाह !!!  बेहद शानदार ग़ज़ल हुई है ये। बधाई आपको आदरणीय पंकज जी

Comment by narendrasinh chauhan on August 28, 2015 at 10:19am

बहुत सुन्दर प्रस्तुति 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 28, 2015 at 1:47am

आदरणीय पंकज जी, बहुत सुन्दर प्रस्तुति हुई है. आपको हार्दिक बधाई इस उम्दा प्रस्तुति पर.

कृपया ध्यान दे...

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