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जख्म दिल का सदा हरा रखिये (एक फिलबदीह ग़ज़ल 'राज')

२१२२  १२१२  २२

भूख हड़ताल बारहा रखिये

हुक्मरानों पे दबदबा रखिये

 

बह रही है हवा सियासत की

किस तरफ बस यही पता रखिये

 

शह्र में चैन हो न हो ठंडक

गर्म मुद्दा कोई नया रखिये

 

सूखने पर कोई न पूछेगा

जख्म दिल का सदा हरा रखिये

 

लोग मरते रहें भले पीकर

हर गली एक मयकदा रखिये

 

क्या करेगा धुआँ धुआँ ही तो है

आप बेख़ौफ़ सिलसिला रखिये 

 

इश्क के साथ दिल्लगी करना

नाम फिर उसका बेवफ़ा रखिये

 

आज बाजार रिश्वतों का है    

जेब में आप कायदा रखिये 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by मिथिलेश वामनकर on January 19, 2016 at 11:58pm

क्या कमाल की ग़ज़ल हुई है दीदी. दिल खुश हो गया वाह वाह वाह.......... कमाल की ग़ज़ल हुई है. बेमिसाल.....सभी शेर एक से एक बढ़कर हुए है. आपको इस ग़ज़ल पर बहुत बहुत बधाई और नमन .... सादर 

Comment by Samar kabeer on January 19, 2016 at 9:36pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,फ़िलबदीह ग़ज़ल में आपको मलका हासिल है,शार्ट नोटिस पर इतनी उम्दा ग़ज़ल,कमाल है बहना,हर शैर बहुत ख़ूब है,बधाई इस ग़ज़ल के लिये |
Comment by नादिर ख़ान on January 19, 2016 at 4:49pm

लोग मरते रहें भले पीकर

हर गली एक मयकदा रखिये ...बढिया व्यंग कहा आदरनीया राजेश कुमारी जी .... 

 

क्या करेगा धुआँ धुआँ ही तो है

आप बेख़ौफ़ सिलसिला रखिये ..... धुआँ धुआँ ही तो है मगर आजकल इसी धुए ने दिल्ली  वालों की नींद उडा रखी है ।धुए को हल्के में नहीं लिया जा सकता ...

आज बाजार रिश्वतों का है    

जेब में आप कायदा रखिये ....... खुबसूरत शेर हुआ है । उम्दा गज़ल के लिये बधाई आदरनीया राजेश कुमारी जी ...

Comment by TEJ VEER SINGH on January 19, 2016 at 12:56pm

हार्दिक बधाई अदरणीय राजेश कुमारी जी!बेहतरीन गज़ल!एक एक शेर लाज़वाब!

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