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शायद मैंने पी ली मधुशाला

 सुन्दर सुन्दर शब्दों का

संग्रह मैंने तो कर डाला

उपयोग नहीं, प्रयोग न जानू

मैंने पी ली मधुशाला

 

कविता लिखने के चक्कर में

मैंने क्या क्या कर डाला

लय नहीं तो क्या हुआ

मैंने प्रयास कर डाला

 

कवि बनने की चाह नहीं

पर कविता लिखना चाहूँ मैं

गीत नहीं संगीत नहीं

पर कविता सुनना चाहूँ मैं

 

ओपन बुक्स व् फेस बुक पर

मैंने प्रसंग रच डाला

प्रतिक्रिया की चाह नहीं

अपने मन की कह डाला

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by PHOOL SINGH on January 27, 2016 at 1:56pm

आपको कोटि कोटि धन्यवाद

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 23, 2016 at 6:58pm

सुन्दर र्प्रयास . कोशिश जारी रहे . 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2016 at 7:56pm

आदरणीय फूल सिंघ भाई , गीत के भाव अच्छे हैं , हार्दिक बधाई आपको । मात्रिकता और शब्द विन्यास मे कुछ कमियाँ ज़रूर हैं , प्रयास करते रहें , यहाँ दिये पाठों का लाभ उठायें ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 21, 2016 at 6:07pm
वाह्ह्ह् फूल सिंह जी ।सुंदर भावाभिव्यक्ति।हार्दिक बधाई
Comment by PHOOL SINGH on January 21, 2016 at 3:27pm

इसके लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद

Comment by TEJ VEER SINGH on January 21, 2016 at 3:07pm

हार्दिक बधाई आदरणीय फ़ूल सिंह जी!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 20, 2016 at 8:55pm

बहुत बढ़िया प्रयास हुआ है हार्दिक बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on January 20, 2016 at 5:37pm
कविता बहुत सुन्दर है , बधाई , सादर।
Comment by PHOOL SINGH on January 20, 2016 at 2:30pm

इसके लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद

Comment by Samar kabeer on January 20, 2016 at 2:08pm
जनाब फूलसिंह जी आदाब,इस शानदार प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकार करें |

कृपया ध्यान दे...

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