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हिफ़ाज़त (लघु कथा )

दिन ढलने का वक़्त क़रीब आरहा था कि अचानक रास्ते पर सामने से कारवां की तरफ कोई आदमी भागता हुआ नज़र आया | वह हांफता हुआ पास आकर बोला ,आगे ख़तरा है मेरा क़ाफ़ला लुट  चूका है | सालारे कारवां ने बिना सोचे समझे उसकी बातों पर यक़ीन करके वहीँ पर क़याम करने का हुक्म देदिया ,हामिद ने लाख कहा इस पर यक़ीन मत करो , मुझे इसकी आँखों में फ़रेब नज़र आरहा है | ...... मगर सब बेकार गया | रात को जब क़ाफ़ले वाले बेख़बर सो रहे थे ,हामिद की आँखों से नींद गायब थी | ...... यकबयक उसे घोड़ों के टापों की आवाज़ सुनाई दी , वह जबतक सबको उठाता कारवां डाकुओं से घिर चूका था और उन्हीं डाकुओं में ख़बर देने वाला भी मौजूद था | ...... हामिद की एक नज़र खबर देने वाले आदमी पर थी और दूसरी नज़र कारवां के सालार पर थी जिनमें कोई खौफ दिखाई नहीं  देरहा था। ...... उसके लबों की ख़ामोशी बिना कहे सारी हक़ीक़त बयां कर रही थी। ......

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2016 at 8:37pm

मोहतरमा प्रतिभा  साहिबा    ,  आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी। ... यह मेरी इस मंच पर पांचवीं लघु कथा है | दो ब्लॉग पर और तीन लघु कथा गोष्ठी पर। ... शुक्रिया

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2016 at 8:33pm

मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा    ,  आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी। ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2016 at 8:32pm

मोहतरम जनाब तेजवीर    साहिब   ,  आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी। ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2016 at 8:31pm

मोहतरमा राहिला    साहिबा   ,  आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी। ...

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2016 at 8:30pm

मोहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी   साहिब  ,  आपकी हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी। ...

Comment by pratibha pande on March 3, 2016 at 8:25pm

बहुत सुन्दर रचना , शायद इस विधा में मंच पर ये आपकी पहली ही रचना है , बहुत सफलता पूर्वक और सहजता से आपने कथ्य को संप्रेषित  किया है ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय तस्दीक जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 3, 2016 at 6:51pm

अर्थात  घर का भेदी ही लंका ढाता है ये सच निकला ..बहुत खूब आ० तस्दीक जी सुन्दर लघु कथा हार्दिक बधाई आपको |

Comment by TEJ VEER SINGH on March 3, 2016 at 12:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी!बेहतरीन प्रस्तुति!

Comment by Rahila on March 2, 2016 at 1:15pm
बहुत बढ़िया प्रस्तुति आदरणीय सर जी! बड़ी चुस्त शैली में रचना का ताना -बाना बुना है आपने । बहुत मुबारक । आदाब
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 2, 2016 at 1:29am
वाह मोहतरम जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान साहब,क्या ग़ज़ब की पेशकश रही यह ....कहा और अनकहा सब ज़बरदस्त। तहे दिल बहुत बहुत मुबारकबाद।

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