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ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

हो गया दिल इश्क़ में बिस्मिल करूँ तो क्या करूँ
ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे दर के सिवा लगता नहीं है दिल कहीं
रास आती है नहीं महफिल करूँ तो क्या करूँ

तू ही साँसों में है धड़कन मे ख़यालों में है तू
बस तुम्ही को चाहता है दिल करूँ तो क्या करूँ

लीक से हटकर अलग चलने की है फ़ितरत मिरी
भीड़ में होता नहीं शामिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे जाने से रस्ते हो गए मुश्किल मिरे
दूर अब लगने लगी मंज़िल करूँ तो क्या करूँ

आज तक चलता रहा राहे सदाक़त पर मगर
राह आगे लगती है मुश्किल करूँ तो क्या करूँ

आज में जीने का 'सूरज' फलसफा अपना लिया
कोई माज़ी है न मुस्तकबिल करूँ तो क्या करूँ

डॉ सूर्या बाली 'सूरज'
(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by rajesh kumari on April 6, 2016 at 11:19am

बहुत शानदार उम्दा ग़ज़ल आ० बाली जी दिल से दाद हाजिर है |

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 1, 2016 at 9:53am

आदरणीय डॉ बाली जी ,,हर शेर उम्दा हैआज में जीने का 'सूरज' फलसफा अपना लिया
कोई माज़ी है न मुस्तकबिल करूँ तो क्या करूँ....वाह ..इस बेहतरीन रचना ..इस रवानगी के लिए ह्रदय से बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by narendrasinh chauhan on March 30, 2016 at 4:09pm

खूबसूरत  ग़ज़ल ,  बहुत मुबारकबाद

Comment by नादिर ख़ान on March 30, 2016 at 11:39am

आदरणीय डॉ  सूर्या बाली जी ग़ज़ल की रवानगी देखते ही बनती है,  खूबसूरत  ग़ज़ल के लिए बहुत मुबारकबाद। .... 

Comment by रामबली गुप्ता on March 30, 2016 at 9:42am
शानदार ग़ज़ल आ.बाली जी। दिली दाद कुबूल फरमाएं।
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 29, 2016 at 10:03pm
बड़ी ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीय सूर्या बाली जी। दाद कुबूल करें
Comment by Sushil Sarna on March 29, 2016 at 7:43pm

हो गया दिल इश्क़ में बिस्मिल करूँ तो क्या करूँ
ज़िंदगी ही हो गयी क़ातिल करूँ तो क्या करूँ

इक तेरे दर के सिवा लगता नहीं है दिल कहीं
रास आती है नहीं महफिल करूँ तो क्या करूँ

वाह आदरणीय डॉ. सूरज बाली जी वाह बड़े ही खूबसूरत अहसासों को आपने अपनी ग़ज़ल में सजाया है। दिली मुबारक बाद कबूल फरमाएं सर।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 29, 2016 at 6:29pm

बधाई इस ग़ज़ल के लिए 
तू ही साँसों में है धड़कन मे ख़यालों में है तू
बस तुम्ही को चाहता है दिल करूँ तो क्या करूँ.. इसे फिर देख लें,, शतुर्गुरबा नुमाया है ...तुम्ही को तुझी करने से शायद ठीक हो सके 
सादर 

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